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    बच्चों की परवरिश में भूलकर भी न करें ये गलती! अच्छे माता-पिता बनने के लिए पढ़ें चाणक्य नीति

    Updated: Wed, 15 Apr 2026 06:30 PM (IST)

    आचार्य चाणक्य, अर्थशास्‍त्र और नीतिशास्‍त्र का जनक माने जाते हैं। उन्होंने अपनी नीति में जीवन जीने के भी कई पहलुओं के बारे में बताया है। ...और पढ़ें

    बच्चों की परवरिश के लिए अपनाएं ये खास तरीके (Picture Credit- AI Generated)

    बच्चों की परवरिश के लिए अपनाएं ये खास तरीके (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. चाणक्य नीति में बताई गई हैं माता-पिता के लिए जरूरी बातें

    2. बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ दें अच्छे संस्कार

    3. शिक्षा से वंचित करने वाले माता-पिता होते हैं बच्चों के दुश्मन

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चाणक्य नीति में बच्चों की परवरिश से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांत बताए गए हैं। इसमें बताया गया है कि आप किस तरह अपने माता-पिता होने के फर्ज को अच्छी तरह निभा सकते हैं। साथ ही चाणक्य नीति में यह भी बताया गया है कि बच्चों के लिए किस तरह के माता-पिता दुश्मन समान होते हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में।

    बच्चे के साथ कैसा व्यवहार करें?

    लालयेत्पञ्चवर्षाणि, दशवर्षाणि ताडयेत्।
    प्राप्ते तु षोडशे वर्षे, पुत्रं मित्रवदाचरेत्।।

    चाणक्य नीति के इस श्लोक में कहा गया है कि जब आपका बच्चा 5 से 15 वर्ष की आयु का हो, तो उसे अनुशासन, सही-गलत का ज्ञान देना चाहिए, फिर चाहे इसके लिए आपको सख्ती ही क्यों न करनी पड़े। लेकिन जब बच्चा 16 साल का हो जाए, तो उससे एक दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए।

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    (Picture Credit- AI Generated)

    क्या है माता-पिता का कर्तव्य?

    पुत्राश्च विविधैः शीलैर्नियोज्याः सततं बुधैः।
    नीतिज्ञाः शीलसम्पन्ना भवन्ति कुलपूजिताः ।।

    चाणक्य नीति के इस श्लोक के अनुसार, बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं करना देना चाहिए, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार, नैतिकता और शिष्टाचार सिखाना चाहिए। इससे बच्चे अच्छे चरित्र वाले बनते हैं और आगे चलकर अपने कुल का नाम रोशन करते हैं।

    बच्चों के लिए दुश्मन हैं ऐसे माता-पिता

    माता शत्रु पिता वैरी येन बालो न पाठितः।
    न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा ।।

    आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में बताया हैं कि किस तरह के माता-पिता अपनी संतान के लिए किसी दुश्मन से कम नहीं होते। इस श्लोक के अनुसार, जो अपने बच्चे को पढ़ाते नहीं है यानी उनकी शिक्षा पूरी नहीं करवाते, ऐसी माता शत्रु और पिता वैरी के समान होते हैं।

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    क्योंकि एक अनपढ़ व्यक्ति विद्वानों की सभा में उसी तरह से तिरस्कार (अपमान) होता है, जैसे हंसों के झुंड में एक बगुले का। इसलिए यह जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए उसकी शिक्षा पर ध्यान दें।

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    (Picture Credit- AI Generated)

    माता-पिता ध्यान रखें ये बात

    लालनाद् बहवो दोषास्ताडनाद् बहवो गुणाः।
    तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्न तु लालयेत् ॥

    कुछ माता-पिता अपने बच्चे को ज्यादा लाड़-प्यार देकर बिगाड़ देते हैं, जिससे बच्चे बदजमीज हो जाते हैं। ऐसे में इस श्लोक में कहा गया है कि अधिक लाड़-प्यार करने से संतान में कई दोष पैदा हो जाते हैं। इसलिए अच्छा व्यवहार सिखाने के लिए कभी-कभी बच्चों के साथ डाट-फटकार या सख्ती करना जरूरी हो जाता है। 

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