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    Chanakya Niti: दुश्मन चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, इस तरह पाएं उस पर विजय

    By Suman SainiEdited By: Suman Saini
    Updated: Thu, 19 Mar 2026 02:11 PM (IST)

    आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में में यह भी बताया है कि आप किस तरह अपने शत्रु पर विजय पा सकते हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में। ...और पढ़ें

    आधुनिक जीवन में भी प्रासंगित है चाणक्य नीति (AI Generated Image)

    आधुनिक जीवन में भी प्रासंगित है चाणक्य नीति (AI Generated Image)

    HighLights

    1. चाणक्य नीति में मिलते हैं महत्वपूर्ण और लोकप्रिय सिद्धांत

    2. आधुनिक जीवन में सटीक बैठती हैं चाणक्य नीति

    3. आसान हो जाती है सफलता प्राप्ति की राह

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चाणक्य नीति (Chanakya Niti), आचार्य चाणक्य द्वारा लिखाय गया एक ग्रंथ है, जो एक महान विद्वान, कूटनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और रणनीतिकार भी थे। उन्होंने इस नीति में जीवन को सफल, सुरक्षित और सुखमय बनाने के कई व्यावहारिक सूत्र बताए हैं। चलिए चाणक्य नीति में वर्णित कुछ श्लोक की मदद से जानते हैं कि आप किस तरह अपने दुश्मन को हरा सकते हैं।

    श्लोक 1 - अनुलोमेन बलिनं प्रतिलोमन दुर्जनम्।
    आत्मतुल्यबलं शत्रुं विनयेन बलेन वा।

    आचार्य चाणक्य के इस श्लोक में कहा गया है कि बलवान शत्रु के साथ विनम्रता, दुष्ट शत्रु के साथ कठोरता और बराबर के शत्रु के साथ साम-दाम-दंड-भेद का प्रयोग करना चाहिए। यह चतुर कूटनीति के माध्यम से आप अपने शत्रु पर विजय पा सकते हैं।

    श्लोक 2 - खलानां कण्टकानां च द्विविधैव प्रतिक्रिया।
    उपानन्मुखभंगो वा दूरतो वा विसर्जनम्॥

    चाणक्य नीति के इस श्लोक का अर्थ है कि दुष्ट लोगों और कांटों अर्थात दुश्मनों से बचने के केवल दो ही उपाय हैं। या तो इन्हें जूतों से कुचल देना चाहिए या उनसे बहुत दूर रहना चाहिए यानी दुश्मन को हराने के लिए बल का प्रयोग करा चाहिए। या फिर शत्रुओं से उलझने के बजाय उन्हें अनदेखा कर देना चाहिए।

    Chanakya AI (1)

    (AI Generated Image)

    चाणक्य देते हैं ये सलाह

    चाणक्य नीति (Chanakya Niti tips) में बताया गया है कि कभी भी अपने दुश्मन को कमजोर समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। शत्रु पर विजय पाने के लिए हमेशा अपने धैर्य, बुद्धि और सही समय का उपयोग करें। इसके साथ ही चाणक्य कहते हैं कि जब तक अपने दुश्मन की कमजोरी न पता चल जाए, तब तक उसके साथ दोस्ती का व्यवहार (साम) करना चाहिए और जैसे ही कमजोरी पता चले, उस पर हमला करना चाहिए।

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    मिलेगी शत्रु पर विजय

    चाणक्य नीति के अनुसार, अपने दुश्मन के सामने कभी भी अपनी कमजोरी या गुप्त योजनाओं को जाहिर नहीं करना चाहिए, वरना आप मुसीबत में पड़ सकते हैं। इसके साथ ही वह यह सलाह भी देते हैं कि दुश्मन पर गुस्सा करना अपनी शक्ति को व्यर्थ करना है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।