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पितरों के श्राद्ध में क्यों जरूरी मानी जाती हैं बेटियां और नातिन? गरुड़ पुराण में बताया गया है इसका महत्‍व

Published: Tue, 18 Aug 2026 07:51 PM (IST)

गरुड़ पुराण के अनुसार, पितरों के श्राद्ध कर्म में बेटियों और नातियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुत्र न होने ...और पढ़ें

गरुड़ पुराण के नियम ! (Picture Credit- AI Generated)

गरुड़ पुराण के नियम ! (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में श्राद्ध और तर्पण को पितरों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। आमतौर पर इन कर्मकांडों का अधिकार पुत्र या पुरुष वंशजों से जोड़ा जाता है। हालांकि, पुत्र न होने की स्थिति में बेटी, नाती या अन्य योग्य परिजन द्वारा श्राद्ध करने को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं मिलती हैं।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि पितरों के प्रति श्रद्धा केवल पुत्र ही व्यक्त कर सकता है। गरुड़ पुराण के अनुसार पितरों का श्राद्ध तब तक अधूरा है, जब घर की बेटी, नातिन, नाती या बहन को उसमें निमंत्रण न भेजा जाए। चलिए जानते हैं है कि इस मान्‍यता का क्‍या महत्‍व है।

पुत्र न हो तो बेटी की भूमिका

यदि किसी परिवार में पुत्र नहीं है, तो गरुड़ पुराण के आधार पर बेटी द्वारा पितरों के लिए तर्पण या अन्य श्राद्ध कर्म किए जाने की अनुमति दी गई है। आज के समय में अनेक परिवारों में बेटियां अपने माता-पिता के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए इस तरह के संस्कारों में भाग लेती हैं। धार्मिक दृष्टि से भी इसे गलत नहीं माना जाता है।

नाती को क्यों माना जाता है योग्य?

गरुड़ पुराण के अनुसार बेटी के बेटे यानी नाती का संबंध भी परिवार की पिछली पीढ़ी से सीधे जुड़ा होता है। इसलिए पुत्र के अभाव में नाती द्वारा नाना-नानी के श्राद्ध और तर्पण का कार्य किया जा सकता है।

श्राद्ध में बेटी और बहन को न्‍योता

मान्‍यता है कि बेटी और बहन हर घर में मान्‍य होती हैं। अगर घर में किसी पूर्वज का श्राद्ध किया जा रहा है , तो बेटी, बहन और नातिन को सबसे पहले भोजन करना चाहिए। इससे पितरों की आत्‍मा भी तृप्‍त होती है। इतना ही नहीं, ऐसा भी कहा जाता है कि जिस घर में बेटियां नहीं होती हैं, उस घर में दूर के रिश्‍ते की बहन बेटियों को बुलाया जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार किसी मृत व्‍यक्ति की भांजी और भांजी की बेटी को भी श्राद्ध का भोजन कराकर, श्राद्ध कर्म को पूर्ण किया जा सकता है।

अत: श्राद्ध में बेटियों और नातिन की भूमिका को लेकर गरुड़ पुराण में बताई गई यह मान्‍यता बहुत ही महत्‍वपूर्ण है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है

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