क्या वास्तव में समुद्र मंथन सावन में हुआ था? पुराणों में छिपा है इसका जवाब
सावन मास का संबंध समुद्र मंथन से गहरा है, जब हलाहल विष निकला और भगवान शिव ने उसे कंठ में धारण कर नीलकंठ कहलाए। ...और पढ़ें

समुद्र मंथन किस मास में हुआ था? (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, सावन का महीना आते ही चारों ओर शिवभक्ति की बहार आ जाती है। कांवड़ यात्रा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के इस पावन महीने का भगवान शिव से क्या संबंध है, इसकी कथा समुद्र मंथन से गहराई से जुड़ी है। इस साल पवित्र सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई 2026, गुरुवार से शुरू हो रही है, जो 28 अगस्त 2026, शुक्रवार के दिन समाप्त होगी।
पौराणिक मान्यताओं और विशेषकर शिवपुराण व भागवत पुराण के काल-गणना संकेतों के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच हुआ ऐतिहासिक समुद्र मंथन सावन के महीने में ही अपने चरम पर था।
हलाहल विष की उत्पत्ति और महादेव का नीलकंठ स्वरूप
कथा के अनुसार, जब क्षीर सागर का मंथन किया जा रहा था, तो उसमें से चौदह रत्न निकले। लेकिन इन रत्नों से पहले एक भयंकर 'हलाहल' नामक विष निकला, जिसकी गर्मी और तीव्रता से तीनों लोक जलने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए सभी देवता भगवान शिव की शरण में गए और अंततः देवाधिदेव महादेव ने उस विष को अपने कंठ में धारण किया। विष के प्रभाव से शिव जी का कंठ नीला पड़ गया, जिससे वे नीलकंठ कहलाए, और उनके शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ गया।
सावन और जलाभिषेक की परंपरा का रहस्य
यह पूरी घटना सावन मास के दौरान घटित हुई थी। विष की तीव्र ज्वाला को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव पर निरंतर जल की वर्षा की। प्रकृति ने भी सावन की रिमझिम फुहारों से महादेव को शीतलता प्रदान की। यही कारण है कि सावन के महीने में शिव जी को जल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। सावन में जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने का मूल उद्देश्य महादेव के कंठ की उसी तपन को शांत करना है।
पुराणों का संदेश: विष को पचाकर सकारात्मकता का संचार
पुराणों का स्पष्ट मत है कि सावन और समुद्र मंथन की घटना का सीधा संबंध है, जो हमें यह सिखाता है कि कैसे बुराइयों को पचाकर संसार में अच्छाई यानी अमृत का संचार किया जाता है।
खबरें और भी
हिंदू शास्त्रों में सावन मास को लेकर क्या कहा गया है?
स्कंद पुराण
स्कंद पुराण के अनुसार, श्रावण मास में काशी में निवास करके भगवान शिव की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
शिव पुराण
शिव पुराण के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस महीने में उन्हें बेलपत्र, जल और दुध अर्पण करना चाहिए।
लिंग पुराण
श्रावण मास में रोजाना शिवलिंग पर जलधारा चढ़ाने से सौ यज्ञों के समान पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।
श्रीमद्भागवतम पुराण
श्रीमद्भागवतम पुराण के अनुसार, श्रावण मास को व्रतों का राजा कहा गया है। इस महीने में भगवान शिव की उपासना करने से सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पुण्य फल मिलता है।
वायु पुराण
वायु पुराण के अनुसार, श्रावण मास के दौरान नदी में स्नान करने के साथ दान और शिव पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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