विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दुर्योधन के जन्म पर क्यों रेंकने लगे थे गधे और छा गया था दहशत का माहौल? पढ़ें महाभारत की दुर्लभ कथा

Updated: Wed, 19 Aug 2026 03:30 PM (IST)

दुर्योधन का जन्म सामान्य नहीं था, बल्कि अशुभ संकेतों और अजीबोगरीब आवाजों के साथ हुआ था। गांधारी की असामान्य गर्भावस्था ...और पढ़ें

दुर्योधन के जन्म से जुड़ी अनोखी कथा

दुर्योधन के जन्म से जुड़ी अनोखी कथा

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आमतौर पर जब किसी बच्चे का जन्म होता है, तो उसे बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। लेकिन क्या हो अगर किसी बच्चे का जन्म उत्साह के बजाय डर से मनाया जाए? महाभारत के मुताबिक, दुर्योधन का जन्म अन्य बच्चों के जन्मों से बिल्कुल अलग था।

दुर्योधन के जन्म पर आनंद गीत की जगह, पूरे राज्य में अजीबोगरीब चीखें गूंज सुनाई दे रही थी। गधे जोर-जोर से रेंक रहे थे, सियार काफी चिल्ला रहे थे और कौवे आकाश की डरावनी आवाजों से भरे हुए थे। राज दरबार में बैठे महाराजा, मंत्री और सेवकों के बीच यह सवाल उठ रहा था कि, क्या ये सामान्य घटनाएं थीं या भविष्य के बारे में दैवीय चेतावनी?

गांधारी की गर्भावस्था सामान्य नहीं

महाभारत से जुड़ी प्रचलित कथाओं के मुताबिक, लंबे समय तक गर्भवती रहने के बाद भी गांधारी ने बच्चे को नहीं, बल्कि एक मांस के लोथड़े को जन्म दिया। इस बात से निराश और हताश होकर गांधारी ने ऋषि व्यास से मदद मांगी।

ऋषि ने गांधारी को आश्वासन देते हुए कहा कि, यह घटना उनके भाग्य का अंत नहीं, बल्कि एक असाधारण अध्याय की शुरुआत है, जो कुरु वंश के भविष्य को आकार देने का काम करेगा।

duryodhana birth story in mahabharata 101 pots and scary omens

ऋषि व्यास ने समस्या से दिलाई निजात

ऋषि व्यास ने अपने दिव्य ज्ञान के आधार पर मांस को करीब 101 टुकड़ों में काटा। हर टुकड़े को घी से भरे एक अलग बर्तन में रखकर उसकी खास देखभाल की। उन्होंने परिवार को उचित समय तक इंतजार करने का आदेश दिया।

महाभारत के मुताबिक, इन्हीं बर्तनों में से आखिरकर गांधारी के बच्चे उत्पन्न हुए, जिससे यह हिंदू साहित्य में सबसे दुर्लभ अनोखी जन्म कथाओं में शामिल हो जाती है।

पहले घड़े से दुर्योधन उत्पन्न हुआ

जब पहला घड़ा खोला गया, तो एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम दुर्योधन रखा गया। हालांकि राजपरिवारों ने इस नन्हे से राजकुमार का स्वागत किया, पर फौरन ही वातावरण पूरी तरह बदल गया। उसके जन्म के कुछ पल बाद से ही राज्य में अजीबोगरीब आवाजें सुनाई देने लगीं। कई लोगों ने इसे असाधारण घटनाओं से जोड़कर बताया।

महाभारत में वर्णित है कि, दुर्योधन के जन्म के समय पूरे राज्य में गधे रेंक रहे थे, सियार चिल्ला रहा था और कौवे 'कांव-कांव' कर रहे थे। प्राचीन भारत में जानवरों के ऐसे व्यवहार को आमतौर पर अशुभ संकेत माना जाता था। इन भयावह संकेतों ने सभा में मौजूद सभी में डर पैदा कर दिया, जो मानते थे कि भाग्य उन्हें कुरु वंश के लिए मुश्किल भरा संकेत दे रहा है। अशुभ संकेतों को नजर अंदाज करके धृतराष्ट्र ने अपने पहले पुत्र को त्यागने से मना कर दिया।

समय बीतने के साथ जब एक-एक करके सभी बर्तन खोले गए, तो गांधारी सौ पुत्रों और एक पुत्री (जिसका नाम दुशाला था) की माता बनीं। ये सभी भाई कौरव कहलाए।

यह भी पढ़ें- क्या सच में अर्जुन से कहीं अधिक शक्तिशाली था कर्ण? महाभारत के सबसे बड़े महारथी का अनसुना सच

यह भी पढ़ें- कलियुग में पूजे जाने वाले खाटू श्याम जी कौन हैं, महाभारत काल से कैसे जुड़ी है इनकी कहानी?

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।