कलियुग में पूजे जाने वाले खाटू श्याम जी कौन हैं, महाभारत काल से कैसे जुड़ी है इनकी कहानी?
खाटू श्याम जी, जिन्हें 'हारे का सहारा' भी कहा जाता है, वो कलियुग के प्रमुख पूजनीय देवताओं में से एक ...और पढ़ें

कलियुग के देवता खाटू श्याम जी का महाभारत से गहरा संबंध (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कलियुग में जब बात आती है सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले भगवानों की तो खाटू श्याम जी का नाम सबसे पहले लिया जाता है।
इन्हें हारे का सहारा भी कहा जाता है और जो भी भक्त परेशान होता है उनकी शरण में जाने से उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। बाबा खाटू श्याम को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन मुख्य रूप से उनका वर्णन महाभारत काल में मिलता है। महाभारत के समय खाटू श्याम जी का असली नाम बर्बरीक था।
वे भीम के पोते और घटोत्कच के बेटे के रूप में जाने जाते थे। जो भीम के बेटे थे। बर्बरीक एक महान योद्धा थे और पूरी महाभारत में सबसे शक्तिशाली लोगों में से एक थे। आइए आपको बताते हैं उनकी कथा के बारे में और कैसे वो कलियुग के देवता के रूप में प्रचलित हुए।
महाभारत युद्ध से खाटू श्याम जी का संबध
महाभारत युद्ध के समय जब बर्बरीक बच्चे थे, तब वो जरूरतमंदों की मदद करते थे। इसी वजह से जब महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था, तब बर्बरीक ने निर्णय लिए कि वो पांडवों का साथ देंगे, लेकिन किसी वजह से उन्हें कौरवों की तरफ होना पड़ा क्योंकि यदि वो ऐसा नहीं करते तो महाभारत का युद्ध समाप्त नहीं होता।
उस समय कृष्ण जी ने उनकी परीक्षा लेने की ठानी और साधु के रूप में बर्बरीक के पास गए। उस समय कृष्ण जी ने बर्बरीक से पुछा कि वो एक बार में कितने योद्धाओं को मार सकते हैं। बर्बरीक ने इस बात का जवाब दिया कि वो तीन बाण से पूरी दुनिया को खत्म कर सकते हैं। उस समय श्री कृष्ण ने उनसे पेड़ की सारी पत्तियां तोड़ने को कहा और उन्होंने एक बाण से ही ऐसा कर दिखाया।
श्री कृष्ण ने की बर्बरीक के शीश की मांग
उस समय श्री कृष्ण ने कुछ देर सोचा और उनसे उनके सिर की मांग की। बर्बरीक चौंक गए और एक पल के लिए स्थिर हो गए, लेकिन फिर उन्हें अपनी मां से किया हुआ वचन याद आया कि उनसे मांगी गई हर वस्तु वो दान कर देंगे और इसी वजह से श्री कृष्ण को अपना सिर देने के लिए तैयार हो गए।
उस समय श्री कृष्ण, बर्बरीक की ईमानदारी और पवित्रता से बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया।
श्री कृष्ण ने दिया बर्बरीक को आशीर्वाद
बर्बरीक की निष्ठा को देखकर श्री कृष्ण ने उन्हें यह आशीर्वाद दिया कि वो कलियुग में श्याम नाम से जाने जाएंगे और उन्हें कलियुग के देवता के रूप में पूजा जाएगा।
कृष्ण ने उन्हें वचन दिया कि महाभारत खत्म होने तक वे अमर रहेंगे और उनका सिर पहाड़ी की चोटी पर रखा जाएगा जिससे वे अपनी आंखो से महाभारत का युद्ध देख सकें। इसी वजह से आज बर्बरीक को खाटू श्याम बाबा के रूप में पूजा जाता है और उनके कटे हुए सिर की पूजा होती है।
इस प्रकार खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' कहा जाने लगा और आज भी भक्त उनकी पूजा विधि पूर्वक करते हैं।
यह भी पढ़ें- खाटू श्याम जी के दरबार में भूलकर भी न मांगें ये 1 वरदान, वरना खुशियां बदल जाएंगी बर्बादी में!
यह भी पढ़ें- आखिर क्यों खाटू श्याम को कहा जाता है तीन बाण धारी? महादेव से मिला था ये वरदान
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
