आखिर क्यों खाटू श्याम को कहा जाता है तीन बाण धारी? महादेव से मिला था ये वरदान
खाटू श्याम जी को 'तीन बाण धारी' क्यों कहा जाता है, यह महाभारत काल से जुड़ी एक पौराणिक कथा पर आधारित है। भगवान शिव ने बर्बरीक को तीन अमोघ बाणों का वरदा ...और पढ़ें

बर्बरीक को कैसे मिले तीन बाण? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। खाटू श्याम जी का संबंध महाभारत (Mahabharat) काल से माना जाता है। हिंदू धर्म में खाटू श्याम जी की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे मन से रोजाना खाटू श्याम जी की साधना करता है। उसे जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
खाटू श्याम जी को तीन बाण धारी कहा जाता है। अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि आखिर किस कारण से खाटू श्याम जी को कहा जाता है तीन बाण धारी (khatu shyam 3 baan story)। अगर नहीं पता, तो आइए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।
खाटू श्याम को इसलिए कहा जाता है तीन बाण धारी
पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत के युद्ध में जब बर्बरीक युद्ध में भाग लेने जा रहे थे, तो उस समय भगवन श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का भेष धारण किया और उनकी परीक्षा ली। प्रभु ने बर्बरीक से कहा कि पीपल के पेड़ के पत्तों को क्या एक ही बाण से वेध (छेदने) सकते हो? बर्बरीक ने इस बात को स्वीकार किया। वहीं, कृष्ण जी ने चुपके से एक पत्ता अपने पैर के नीचे दबा लिया। इसके बाद बर्बरीक ने पहले बाण से पेड़ के सभी पत्तों पर निशाना लगाया।
इसके बाद बर्बरीक भगवान श्रीकृष्ण के पास आया और उनके पैर के पास आकर चक्कर काटने लगा। तीर को भी इस बात की जानकारी थी कि एक पत्ता पैर के नीचे है। इस दृश्य को देख भगवान श्रीकृष्ण को पता चला कि बर्बरीक के बाण अचूक हैं। बर्बरीक की इसी शक्ति की वजह से खाटू श्याम जी को तीन बाण धारी कहा जाता है। खाटू श्याम जी 3 बाणों की मदद से कौरवों को युद्ध जिता सकते थे।
(Picture Credit- AI Generated)
बर्बरीक महान योद्धा थे। उन्होंने भगवान शिव की तपस्या की। इससे महादेव प्रसन्न होकर उन्हें तीन अमोघ बाण दिए थे। शिव जी ने आशीर्वाद दिया था कि इन तीन बाणों से तीनों लोकों में विजय प्राप्त कर सकते हैं।
शास्त्रों में मिलता है वर्णन
बर्बरीक के तीन अमोघ बाण का वर्णन स्कंद पुराण (Skanda Purana) में देखने को मिलता है।
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