क्या सच में अर्जुन से कहीं अधिक शक्तिशाली था कर्ण? महाभारत के सबसे बड़े महारथी का अनसुना सच
महाभारत के सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में से एक कर्ण, हजारों सैनिकों का सामना करने और दिव्य अस्त्रों का प्रयोग करने में सक्षम थे। गुरु परशुराम के शिष्य क ...और पढ़ें

महाभारत का बलशाली योद्धा कर्ण की ताकत का सच (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत के दो प्रमुख महाकाव्यों में से एक महाभारत जिसे प्राचीन काल का विशाल युद्ध माना जाता है। य युद्ध किसी भी तरह से छोटा-मोटा जनजातीय संघर्ष नहीं था, बल्कि एक अखिल भारतीय युद्ध था,जिसमें 30 से ज्यादा राज्य, हजारों की संख्या में सेनापति, लाखों की संख्या में सैनिक और सैकड़ों कुलीन परिवार शामिल थे। महाभारत में साफतौर पर कहा गया है कि, कुरुक्षेत्र की युद्ध भूमि में मरने वाले योद्धाओं की संख्या हजार- दो हजार नहीं, बल्कि 1.66 अरब योद्धा मारे गए थे।
वैसे तो इस युद्ध में शामिल होने वाले योद्धा एक से बढ़कर एक थे, लेकिन आज हम बात करेंगे सूर्य पुत्र कर्ण की, जिनके कुशल धनुर्धर के आगे अच्छे-अच्छे योद्धा कमजोर पड़ जाते थे। आइए जानते हैं आखिर सूर्य पुत्र कर्ण में कितनी ताकत थी?
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कर्ण को महारथी की उपाधि प्राप्त थी। माना जाता है कि, वह एक साथ हजारों सैनिकों का सामना करने में सक्षम थे। इसके अलावा अपनी उम्र के सबसे ताकतवर योद्धाओं को भी हराने का दम रखते थे। महाभारत में कर्ण का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी अर्जुन को बताया जाता है। उनके बीच की लड़ाई को हमेशा दो महान धनुर्धरों के बीच की सबसे घातक लड़ाई माना जाता था।

भगवान परशुराम के शिष्य
जब गुरु द्रोणाचार्य ने कर्ण को धनुर्धर कोशल सिखाने से मना कर दिया, तब कर्ण ने भगवान परशुराम के सानिध्य में रहकर युद्ध की खास ट्रेनिंग ली। उन्होंने दिव्य हथियारों और तीरंदाजी की ऐसी खास तकनीकों विजय हासिल की, जिसका ज्ञान बहुत कम योद्धाओं के ही पास था।
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कर्ण के पास भार्गवास्त्र, नागस्त्र, ब्रह्मास्त्र और दिव्य वासवी शस्त्र जैसे शक्तिशाली हथियार थे, जो सबसे बलशाली योद्धाओं को भी मार सकते थे। कर्ण ने दुर्योधन के साथ मिलकर कई राजाओं को हराया था। इस दौरान कर्ण ने कई राज्यों को भी जीता और खुद को भारत का सबसे महान योद्धाओं में से एक बना लिया।
विरोधियों के खिलाफ निडर
कर्ण की ताकत का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि, उन्होंने कभी अर्जुन, भीम, सात्यकि, घटोत्कच या अन्य ताकतवर योद्धाओं को चुनौती देने में संकोच नहीं किया।
कर्ण तीरंदाजी के साथ-साथ तलवारबाजी, भाले और हस्त युद्ध में माहिर थे।
महाभारत के अंतिम युद्ध तक कर्ण ने अपने असली कवच और बालियां खो दी थीं। वासावी शक्ति का इस्तेमाल कर लिया था, श्राप का प्रभाव झेला था और फिर भी सबसे ऊंचे स्तर पर लड़ना जारी रखा।

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