शिव से लेकर सूर्य देव तक: महाभारत में देवताओं ने अर्जुन को सौंपे थे ये महाविनाशकारी अस्त्र
महाभारत के महान योद्धा अर्जुन ने कुरुक्षेत्र में कौरवों का सामना अपने दिव्य अस्त्रों से किया। इनमें ब्रह्मास्त्र, पाशुपतास्त्र, वज्र, यमदंड, वरुड़पास ...और पढ़ें

अर्जुन के पास कौन-कौन से दिव्य अस्त्र थे? (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। द्वापर युग के आखिर में करीब 3137 ईसा पूर्व में महाभारत हुआ था। जब कभी भी इस प्रमुख महाकाव्य के मुख्य योद्धाओं का नाम लिया जाता है, तो अर्जुन का नाम सबसे पहला आता है। अर्जुन एक महान धनुर्धर होने के साथ-साथ अस्त्र-शस्त्र के ज्ञाता गुरु द्रोणाचार्य का सबसे खास शिष्य भी था।
पांडव पुत्र अर्जुन ने कुरुक्षेत्र की भूमि में अपने दिव्य धनुष गांडीव की मदद से आधी से ज्यादा कौरव सेना को अकेले मौत के घाट उतार दिया था। आज हम महाभारत काल के वीर योद्धा कहे जाने वाले अर्जुन के उन दिव्य शस्त्रों के बारे में बात करेंगे, जिनके दम पर उन्होंने कौरवों की सेना का विनाश किया था।
अर्जुन के दिव्य अस्त्र-शस्त्र
ब्रह्मास्त्र
हिंदू धार्मिक ग्रंथों में ब्रह्मास्त्र को सभी अस्त्रों का राजा कहा जाता है। पुराणों के अनुसार जब युद्ध भूमि में ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल किया जाता था, तो दुश्मन थर-थर कांपने लगते थे।
महाभारत काल में इस दिव्य अस्त्र को ब्रह्मा जी ने अर्जुन को दिया था। वेदों के मुताबिक, इस अस्त्र का इस्तेमाल युद्ध भूमि में तब किया जाता था, जब कोई विकल्प नहीं बचता था।
पाशुपतास्त्र
पाशुपतास्त्र अस्त्र भी भगवान शिव का बेहद दुर्लभ और विलक्षण अस्त्र था। अर्जुन की भक्ति से खुश होकर भगवान शिव जी ने उन्हें अपना खास अस्त्र प्रदान किया था।
इसके बारे में बताया जाता है कि, यह अस्त्र भगवान शिव के नेत्र, हृदय और शब्दों से नियंत्रित होता था। महाभारत काल में अर्जुन ने पाशुपतास्त्र अस्त्र से ही जयद्रथ का वध किया था।
वज्र अस्त्र
अर्जुन के पास स्वर्ग के देवता इंद्रराज का वज्र अस्त्र, महेंद्र अस्त्र और शक्ति अस्त्र था। देवराज इंद्र के साथ स्वर्ग के अन्य देवताओं ने भी अपने अस्त्र अर्जुन को प्रदान किए थे।
यमदंड अस्त्र
मृत्यु के देवता यमराज ने भी अपना खास अस्त्र यमदंड अर्जुन को प्रदान किया था, जो सिर्फ अर्जुन के ज्ञान पर ही काम करता था। इस अस्त्र का इस्तेमाल भी सिर्फ जरूरी परिस्थितियों में ही किया जाता था।
वरुडपास अस्त्र
अर्जुन के पास वरुड़पास अस्त्र काफी हद तक नागअस्त्र से मिलता-जुलता अस्त्र था, लेकिन इसी शक्तियां नागपास अस्त्र से काफी ज्यादा प्रभावशाली थी। इस अस्त्र के प्रयोग से खुद देवताओं का बचना भी असंभव था।
आदित्य अस्त्र
अर्जुन को भगवान सूर्य से भी एक खास अस्त्र मिला था। उस दिव्य अस्त्र का नाम आदित्य अस्त्र था, जिसे दिव्यास्त्र के नाम से जाना जाता था। यह अस्त्र मंत्रों की शक्ति से चलता था।
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