Pradosh Vrat 2026: शोभन योग में मनाया जाएगा फाल्गुन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत, मिलेगा दोगुना फल
फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत रविवार, 01 मार्च को है, जिसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन दुर्लभ शोभन योग और रवि पुष्य योग सहित कई शुभ संयोग बन ...और पढ़ें

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, रविवार 01 मार्च को फाल्गुन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत है। रविवार के दिन पड़ने के चलते यह रवि प्रदोष व्रत कहलाएगा। रवि प्रदोष व्रत करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही आरोग्य जीवन का वरदान मिलता है।

ज्योतिषियों की मानें तो फाल्गुन माह के अंतिम प्रदोष व्रत पर दुर्लभ शोभन योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक को जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होगी। आइए, शुभ मुहूर्त एवं योग के बारे में जानते हैं-
कब मनाया जाता है प्रदोष व्रत? (Pradosh Vrat 2026)
प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत मनाया जाता है। यह दिन देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और जगत की देवी मां पार्वती की पूजा की जाती है। त्रयोदशी तिथि पर शिव-शक्ति की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।
कब है फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत? (Bhaum Pradosh Vrat 2026 Kab Hai)
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शनिवार 28 फरवरी को रात 08 बजकर 43 मिनट से शुरू होगी। वहीं, रविवार 01 मार्च को शाम 07 बजकर 09 मिनट पर समाप्त होगी। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसके लिए रविवार 01 मार्च को फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत मनाया जाएगा।
खबरें और भी
रवि प्रदोष व्रत शुभ योग (Pradosh Vrat Shubh Muhurat)
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, फाल्गुन माह के अंतिम प्रदोष व्रत पर दुर्लभ शोभन योग का संयोग बन रहा है। शोभन योग दोपहर 02 बजकर 33 मिनट तक है। शुभ कार्य करने के लिए शोभन योग को श्रेष्ठ माना जाता है। इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से शुभ कामों में सफलता मिलेगी।
रवि पुष्य योग
रवि प्रदोष व्रत पर रवि पुष्य योग का भी निर्माण हो रहा है। इस योग का संयोग सुबह 06 बजकर 58 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक है। इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से अक्षय फल प्राप्त होगा। इसके साथ ही रवि योग का भी संयोग है।
नक्षत्र एवं चरण
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पुष्य और अश्लेषा नक्षत्र का संयोग है। वहीं, कौलव, तैतिल और गर करण के योग हैं। इन योग में भक्ति भाव से शिव-शक्ति की पूजा की जाएगी।
यह भी पढ़ें- Pradosh Vrat 2026: चैत्र महीने में कब-कब है प्रदोष व्रत? यहां नोट करें शुभ मुहूर्त और महत्व
यह भी पढ़ें- Holika Dahan 2026: 2 या 3 मार्च कब है होलिका दहन? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।