ब्रज की गलियों में कब गूंजेगी लाठियों की आवाज, क्या आप जानते हैं कैसे हुई लट्ठमार होली की शुरुआत?
फाल्गुन माह में ब्रज की विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली 25 फरवरी को मनाई जाएगी। यह उत्सव भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की लीलाओं से जुड़ा है, जहाँ बरसाना क ...और पढ़ें

लट्ठमार होली का उंटडाउन शुरू (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। फाल्गुन का महीना आते ही पूरे ब्रज में होली का उत्साह का देखने को मिलता है। ब्रज की होली एक अद्भुत प्रेम उत्सव है। इस पर्व के आने का हर कोई इंतजार करता है। ब्रज की लड्डू मार और लट्ठमार (Lathmar Holi 2026) होली विश्व प्रसिद्ध है। इस खास उत्सव पर ब्रज में अलग ही धूम देखने को मिलती है।
यह उत्सव 40 दिनों तक चलता है। होली से पहले लड्डू मार और लट्ठमार होली खेली जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर कैसे हुई लट्ठमार होली (Lathmar Holi 2026 History) की शुरुआत। अगर नहीं पता, तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इस खास परंपरा की शुरुआत कैसे हुई।
कब मनाई जाती है लट्ठमार होली?
वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर लट्ठमार होली खेली जाती है। इस बार 26 फरवरी को लट्ठमार होली उत्सव मनाया जाएगा।

(Image Source: AI-Generated)
इस तरह शुरू हुई लट्ठमार होली?
लट्ठमार होली की परंपरा भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी से जुड़ी है। पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण ग्वाल-बालों के साथ नंदगांव से राधारानी के गांव बरसाना आया करते थे। तब बरसाना की राधा रानी और उनकी सखियों को तंग किया करते थे और उनपर रंग डालते थे।
उन्हें सबक सिखाने के लिए श्रीराधा जी और उनकी संग की सखियां कृष्ण जी और ग्वाल-बालों को लाठी से पीटती थी। तो वे अपने बचाव के लिए ढालों का प्रयोग करते थे। भगवान श्रीकृष्ण की इस लीला को लट्ठमार होली नाम दिया गया है। तभी से इस परंपरा को निभाया जा रहा है। इस दौरान पूरे ब्रज में खास रौनक देखने को मिलती है। गलियों में लाठियों की और गीत को गीत का सुनाई देती है।
खबरें और भी
-1770710778384.jpg)
(Image Source: AI-Generated)
लट्ठमार होली के नियम
- ऐसा माना जाता है कि लट्ठमार होली में शामिल होने के लिए नियम का पालन करना जरुरी होता है। लट्ठमार होली पारिवारिक और सामाजिक परंपरा है।
- लट्ठमार होली के दौरान नंदगांव के पुरुष सखा बनकर आते हैं और बरसाना की महिलाएं (राधा की सखियां) उन्हें लाठी से पीटती हैं।
- इस उत्सव में पुरुषों को हुरियारे के नाम से जाना जाता है।
- लट्ठमार होली के दौरान पगड़ी और चमड़े की ढाल का प्रयोग करते हैं।
- पुरुष रसिया गायन करते हैं।
- महिलाएं घूंघट कर पुरुषों पर लाठी बरसाती हैं।
यह भी पढ़ें- Holika Dahan 2026: होलिका दहन की अग्नि में न डालें ये चीजें, वरना उसी दिन शुरू हो जाएगी उल्टी गिनती
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।