किताबी ज्ञान ही काफी नहीं! गुरुकुल के 4 सिद्धांत जो आज के बच्चों को सिखाना बेहद जरूरी है
भारत की प्राचीन गुरुकुल शिक्षा प्रणाली वैदिक काल से चली आ रही है, जहां विद्यार्थी गुरु के अधीन रहकर सर्वांगीण शिक्षा प्राप्त करते थे। ...और पढ़ें

गुरुकुल शिक्षा से जुड़े 4 सिद्धांत (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में गुरुकुल की परंपरा काफी प्राचीन शिक्षा प्रणाली है, जहां विद्यार्थी अपने गुरु के अधीन रहकर शिक्षा-दीक्षा हासिल करते हैं। हिंदू धर्म के अलावा सिख, जैन और बौद्ध धर्म में गुरुकुल परंपरा से जुड़ी शिक्षा को महत्व दिया जाता है।
गुरुकुल यह नाम संस्कृत के गुरु (शिक्षक) और कुल (क्षेत्र) से मिलकर बना है। इसका हिंदी अनुवाद गुरु का क्षेत्र या परिवार के रूप में किया जाता है।
वैदिक काल में गुरुकुल की भूमिका
भारत में वैदिक काल से ही गुरुकुल अस्तित्व में हैं। इनमें ज्ञान से जुड़े सभी क्षेत्रों की शिक्षा दी जाती है, जिसमें यौगिक अभ्यास तक शामिल थे। गुरुकुल में छात्रों से उम्मीद की जाती थी कि, वे जब तक गुरुकुल में रहेंगे गुरु की सेवा करेंगे, उनसे मिलने वाली शिक्षा ग्रहण करेंगे और खाना पकाने व कपड़े भी खुद धोएंगे।
इस परंपरा ने हिंदू धार्मिक और नैतिक नियमों के बचाव और शास्त्रों के ज्ञान और उससे जुड़ी परंपराओं को पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद की है। गुरुकुल प्रणाली (Gurukul System) से जुड़ी 4 ऐसे सिद्धांत जिसे हमें आज की शिक्षा प्रणाली में शामिल करने की जरूरत है। वो कौन-से 4 सिद्धांत हैं आइए जानते हैं इसके बारे में।
चरित्र निर्माण (Character Building)
गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली आज की आधुनिक शिक्षा प्रणाली से काफी अलग थी। गुरुकुल में विद्यार्थियों के मार्क्स या सबजेक्ट पर फोकस नहीं होता था, बल्कि जीवन जीने के मूल्यों पर जोर दिया जाता था।
गुरुकुल में केवल विषयों के ज्ञान पर फोकस नहीं होता था, बल्कि विद्यार्थियों को कैसे अनुशासन में रहना, उनका मनुष्य धर्म क्या कहता है और नैतिक जीवन से जुड़े मूल्यों पर भी ध्यान दिया जाता था। जिस वजह से वह अच्छे इंसान बनते थे।
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एकीकृत प्रणाली (Integrated System)
आज की आधुनिक शिक्षा में जहां हर सबजेक्ट के लिए अलग-अलग तरह की किताबे पढ़ाई जाती थीं, गुरुकुल में इसके विपरीत होता था। वहां अलग-अलग विषयों को एकीकृत करके एक फिलॉसफी की तरह पढ़ाया जाता था।
जिससे हर विद्यार्थी को पूरा कॉंसेप्ट आसानी से समझ में आ जाता था ताकि उसके पीछे का लॉजिक क्लियर हो जाए।
जीवन कौशल (Life Skills)
आज की आधुनिक शिक्षा प्रणाली में बच्चों को कहा जाता है कि, कोडिंग सीख लो, साइकोलॉजी सीख लो लेकिन डे टू डे की बेसिक लाइफ स्किल्स है, उस पर ध्यान नहीं देते हैं। जबकि गुरुकुल में बच्चों को बागवानी, इस्त्री, खाना बनाना, तैराकी करना या कई तरह के खेल से जुड़े क्रियाकलाप करने के लिए बच्चों को मना करते हैं। जबकि गुरुकुल में नियमित दिनचर्या का ही हिस्सा था।
शिक्षक के साथ संबंध (Relationship with the teacher)
गुरुकुल में गुरु शिष्य के बीच गहरा संबंध था। जो पूरी की पूरी शिक्षा प्रणाली का आधार माना जाता है। बिना गुरु के कोई भी बच्चा या शिष्य यह नहीं समझ सकता है कि, जो चीज सीखी है, उसे असल जीवन में कैसे इस्तेमाल करना है।
शिष्य के जीवन में गुरु एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है, जो आज के स्कूलों में अपनानी चाहिए ताकि बच्चे शिक्षक से डरे नहीं, बल्कि उनसे सही और अच्छा ज्ञान हासिल करें।
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