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    खराब लाइफस्टाइल से हैं परेशान? प्रेमानंद महाराज से जानिए दिनचर्या सुधारने के अचूक नियम

    Updated: Sun, 28 Jun 2026 12:18 PM (IST)

    प्रेमानंद महाराज ने खराब दिनचर्या सुधारने के लिए  महत्वपूर्ण नियम बताए हैं। उन्होंने कहा कि पाप ही दुख का कारण है और नाम जप से पाप नष्ट होते हैं, जिसस ...और पढ़ें

    प्रेमानंद महाराज से जानिए सही दिनचर्या से जुड़े 4 नियम

    प्रेमानंद महाराज से जानिए सही दिनचर्या से जुड़े 4 नियम

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में खराब लाइफस्टाइल को लेकर हर कोई चिंतित नजर आता है। रात-रात भर रील स्क्रोल करने की आदत न केवल नींद को प्रभावित करती है, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्तर पर गंभीर असर दिखाती है। परिणाम स्वरूप जब व्यक्ति सुबह उठता है, तो उसे आलस, ऊर्जा की कमी और पेट से जुड़ी समस्या सताने लगती है। यह सब केवल खराब दिनचर्या के कारण होता है।

    जब खराब दिनचर्या को सुधारने को लेकर प्रेमानंद महाराज जी से एक भक्त ने सवाल किया तो उन्होंने कुछ आदतों को अपनाने की सलाह दी। आखिर प्रेमानंद महाराज ने भक्त को बेहतर दिनचर्या सुधारने के लिए क्या नियम बताए हैं? आइए जानते हैं।

    प्रेमानंद महाराज ने क्या दिनचर्या बताई?

    महाराज जी कहते हैं कि, जिस भी युवा या युवती को अपनी दिनचर्या सुधारनी है, उसे सकारात्मक और ऊर्जावान बनाना है, तो सबसे पहले ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा। जो लोग ब्रह्मचर्य से जुड़े नियमों को मानते हैं, उन्हें जरूर लाभ मिलता है। विवाह के पश्चात सिर्फ अपनी पत्नी के संग ही रिश्ता रखें, अन्य किसी भी माता या बहन की ओर गंदी दृष्टि न रखें।

    इसके अलावा महाराज जी कहते हैं कि, खान-पान सात्विक होना चाहिए। कोशिश करें कि, घर का बना ही भोजन ग्रहण करें। अगर किसी भी तरह का नशा करते हैं, तो फौरन छोड़ दीजिए। मांसहारी या अभक्ष भोजन न करें। ऐसे लोगों से दूर रहे जो हमेशा गलत सलाह देता है।

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    प्रेमानंद महाराज आगे कहते हैं कि, मोबाइल फोन में ऐसी वीडियो न देखे जो गंदे विचारों से भरी है। सबसे जरूरी राधा नाम का जाप करें। जो व्यक्ति राधा नाम का जाप करेगा उसे धीरे-धीरे पता चल जाएगा कि, जीवन का असली सुख क्या है।

    पाप ही दुख का कारण - प्रेमानंद महाराज

    प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, पाप ही असल दुख का कारण है, और नाम जाप से पाप कटते हैं। जब आप निरंतर नाम जप करते हैं, तो पाप नष्ट होने के साथ भगवान सब तरह का सुख देंगे।

    प्रेमानंद महाराज हितहरिवंश से जुड़ी एक प्रसिद्ध पद के माध्यम से कहते हैं कि,

    इहि परलोक सकल सुख पावत, मेरी सौं, कृष्ण गुन संचु॥

    अर्थात- नाम जप करने से इस लोक और परलोक दोनों में संपूर्ण सुखों की प्राप्ति होती है।

    प्रेमानंद महाराज के अनुसार, जिस व्यक्ति का खानपान पवित्र, आचरण पवित्र और संयम पूर्वक नाम जप करता है, तो उस कल्याण होना तय है। महाराज ने इसे एक पंक्ति के माध्यम से समझाते हुए कहा कि,

    पुरुष नपुंसक नारि वा जीव चराचर कोइ।सर्ब भाव भज कपट तजि मोहि परम प्रिय सोइ॥

    अर्थात्- यह चौपाई श्रीरामचरित मानस के उत्तरकांड से जुड़ी है। जिसमें कहा गया है कि,चाहे पुरुष हो, नपुंसक हो, नारी हो या फिर कोई भी जीव क्यों न हो। जब कोई छल-कपट छोड़कर सच्ची श्रद्धा के साथ भजन-कीर्तन और नाम जप करता है, तो मुझे सबसे ज्यादा प्रिय लगता है।

    प्रेमानंद महाराज की दिनचर्या

    गंदे आचरण के साथ नाम जप का लाभ मिलता है?

    महाराज जी कहते हैं, कि जो लोग नाम जप के साथ गंदे आचरण करते हैं, उनके जीवन में चाहे वो कितना ही भगवान का नाम क्यों न ले ले परम सुख की प्राप्ति नहीं होगी। इसलिए पहले अपने अंदर की कमियों को दूर करें, गंदे आचरण छोड़ें तभी जाकर राधा नाम का असली सुख प्राप्त होगा।

    जो व्यक्ति नाम जप के सहारे पापाचरण करता है, वह कभी भी आनंद प्राप्त नहीं कर सकता। इसलिए अच्छी दिनचर्या के लिए सबसे जरूरी है गंदे विचारों से दूर रहना, गंदे आहार से बचना, गंदे चलचित्रों को न देखना, गंदे मित्रों से दूर रहना, गंदे पेय पदार्थ न पीना तो काफी जल्दी भगवत आनंद की प्राप्ति होती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।