करियर और व्यापार में आ रही है रुकावट? तो गंगा सप्तमी के दिन करें शिवलिंग से जुड़ा ये 1 काम
सनातन धर्म में गंगा सप्तमी का विशेष महत्व है, जो वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाई जाती है। इस दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुईं। ...और पढ़ें

कब है गंगा सप्तमी? (AI Generated Image)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में गंगा सप्तमी का विशेष महत्व है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर यह पर्व हर साल मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुईं। इसलिए इस खास अवसर पर मां गंगा की पूजा-अर्चना करने का विधान है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां गंगा की साधना करने से साधक को सभी दुखों से छुटकारा मिलता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। मान्यता है कि मां गंगा महादेव की जटाओं में निवास करती हैं। इसलिए इस शुभ अवसर पर सुबह स्नान करने के बाद गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करने का विशेष महत्व है।
ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से करियर और व्यापार में आ रही रुकावट दूर होती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि गंगा सप्तमी (Ganga Saptami 2026) के दिन शिवलिंग का अभिषेक कैसे करें?
गंगा सप्तमी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Ganga Saptami 2026 Date And Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख महीने में 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी मनाई जाएगी।
वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि का प्रारंभ- 22 अप्रैल को रात 10 बजकर 50 मिनट पर
वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि का समापन- 23 अप्रैल को रात 08 बजकर 50 मिनट पर
खबरें और भी
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 20 मिनट से 05 बजकर 04 मिनट तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 22 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 50 मिनट से 07 बजकर 12 मिनट तक
अमृत काल- शाम 06 बजकर 41 मिनट से 08 बजकर 11 मिनट तक
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इस तरह करें अभिषेक
- सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें।
- सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।
- मंदिर की सफाई करें।
- पात्र में गंगाजल और फिर शुद्ध जल लें और शिवलिंग के पास उत्तर दिशा की ओर मुख करके खड़े हों।
- जल को धार में शिवलिंग पर अर्पित करें।
- इस दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें।
- शिवलिंग पर सफेद चंदन का तिलक लगाएं।
- बेलपत्र अर्पित करें।
- देसी घी का दीपक जलाएं।
- फल और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाएं।
- आखिरी में लोगों में प्रसाद का वितरण करें।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।