मृत्यु के बाद आत्मा को चुनने पड़ते हैं ये 3 रास्ते, जानिए आपका कर्म आपको कहां ले जाएगा?
गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा के तीन मार्ग बताए गए हैं, जो व्यक्ति के कर्मों पर आधारित होते हैं। ये मार्ग आत्मा को मोक्ष, पुनर्जन्म या नरक लोक क ...और पढ़ें

प्राण निकलने के बाद कहां जाती है आत्मा? (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण को अधिक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। इस ग्रंथ में मृत्यु, परलोक और कर्मों से जुड़े फल के बारे में वर्णन किया गया है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि व्यक्ति के साथ मृत्यु के समय क्या होता है, प्राण कैसे निकलते हैं।
गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है। व्यक्ति की मृत्यु के बाद शरीर यहीं रह जाता है और आत्मा निकलकर कर्मों के अनुसार आगे की यात्रा तय करती है। शरीर से प्राण निकलने के बाद आत्मा को 3 रास्तों से गुजरना पड़ता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वो कौन से 3 मार्ग हैं, जिनसे आत्मा को गुजरना पड़ता है? अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।
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1. अर्चि मार्ग- गरुड़ पुराण के अनुसार, इस मार्ग को देवयान मार्ग भी कहा जाता है। यह प्रकाश, ज्ञान और देवताओं का मार्ग माना जाता है। अर्चि मार्ग से वो आत्माएं जाती हैं, जिन्होंने जीवन में सदैव बिना किसी स्वार्थ के काम किया हो और अध्यात्म से जुड़े नियम का पालन किया हो। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि अर्चि मार्ग से आत्माएं सीधे ब्रह्मलोक में जाती हैं, जिससे आत्मा को मोक्ष की प्राप्त होती है और जन्म-मरण के चक्र से छुटकारा मिलता है।
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2. धूम मार्ग- इस मार्ग को पितृयान मार्ग के नाम से जाना जाता है। इस मार्ग से वे आत्माएं जाती हैं, जिन्होंने जीवन में अच्छे काम, दान-पुण्य और धार्मिक कार्य किए होते हैं। ऐसा माना जाता है कि धूम मार्ग से जाने वाली आत्माएं पुण्यों का फल भोगने के बाद जब इनके पुण्य क्षीण हो जाते हैं, तो इसके बाद इन आत्माओं को मृत्युलोक में वापस आकर दोबारा जन्म लेना पड़ता है।
3. उत्पत्ति-विनाश मार्ग- गरुड़ पुराण में बताया गया है कि इस मार्ग में आत्मा को नरक लोक की यात्रा का सामना करना पड़ता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उत्पत्ति-विनाश मार्ग में आत्मा को वैतरणी नदी को पार करनी पड़ती है। यह मार्ग आत्मा के लिए अधिक कष्टकारी होता है। इस मार्ग से जीवन में बुरे और पाप कर्म करने वाली आत्मा जाती है। वैतरणी नदी पापी आत्माओं के लिए कष्टकारी होती है, लेकिन अच्छे कर्म करने वाली आत्मा इस नदी को आसान से पार लेती है।
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