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    मृत्यु के बाद आत्मा को कैसे मिलता है नया शरीर? गरुड़ पुराण से जानिए क्यों जरूरी पिंडदान

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 09:56 AM (IST)

    गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को सूक्ष्म शरीर प्राप्त करने और प्रेत योनि में भटकने से बचाने के लिए पिंडदान आवश्यक है। यह अनुष्ठान आत्मा क ...और पढ़ें

    क्यों जरूरी है पिंडदान? (Picture Credits- AI Image)

    क्यों जरूरी है पिंडदान? (Picture Credits- AI Image)

    HighLights

    1. पिंडदान आत्मा को सूक्ष्म शरीर प्रदान करने में सहायक है।

    2. पिंडदान न करने पर आत्मा प्रेत योनि में भटकती रहती है।

    3. यह आत्मा को परलोक यात्रा के कष्टों से मुक्ति दिलाता है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातम धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथ गरुड़ पुराण में अंतिम संस्कार और मृत्यु के बाद की यात्रा के बारे में बताया गया है। इसमें कई कर्मकांडों को महत्वपूर्ण माना जाता है, जिनको करना जरूरी होता है। इनमें पिंडदान को सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि मृतक व्यक्ति का पिंडदान करने से सांसारिक मोह-माया से मुक्ति मिलती है।

    गरुड़ पुराण के अनसार, मृतक व्यक्ति का पिंडदान न करने से उसकी आत्मा प्रेत योनि में भटकती रहती है। क्या आप जानते हैं कि मृत्यु के बाद क्यों जरूरी है पिंडदान? अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं इसकी वजह के बारे में।

    क्यों जरूरी है पिंडदान?

    गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जब अंतिम समय में आत्मा शरीर छोड़ती है, तो उसका कोई शरीर नहीं होता है। उसको यमलोक की यात्रा करने के लिए एक शरीर की जरूरत होती है। इसलिए मृत्यु के बाद पिंडदान किया जाता है। पिंडदान करने से सूक्ष्म शरीर का निर्माण होता है और आत्मा को शरीर मिल जाता है, जिसकी वजह से आत्मा को योनि में नहीं भटकना पड़ता।

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    अगर पिंडदान न किया जाए तो क्या होगा?

    गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर मृतक का पिंडदान नहीं किया जाता, तो उस आत्मा को सूक्ष्म शरीर प्राप्त नहीं होता। इस वजह से आत्मा भटकती रहती है। वे यमलोक की यात्रा नहीं कर पाती। आत्मा को भूख लगती है, लेकिन शरीर न होने के कारण वह कुछ ग्रहण नहीं कर सकती।

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    (Picture Credits- AI Image)

    पिंडदान के लाभ

    • गरुड़ पुराण के अनुसार, मृतक का पिंडदान करने से आत्मा को प्रेत योनि में भयानक कष्टों का सामना नहीं करना पड़ता।
    • इसके अलावा पिंडदान करने से मृतक को परलोक यात्रा की कठिन यात्रा में शक्ति प्राप्त होती है।
    • ऐसा माना जाता है कि विधिपूर्वक पिंडदान करने से आत्मा को सांसारिक मोह-माया से छुटकारा मिलता है।

    पिंडदान के दौरान रखें इन बातों का ध्यान?

    • पिंडदान करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख होना चाहिए।
    • इस दौरान काले रंग के कपड़े धारण न करें। किसी से वाद-विवाद न करें।
    • पिंडदान को विधिपूर्वक करना चाहिए।
    • पिंडदान करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। साथ उन्हें दान-दक्षिणा देनी चाहिए।

    गरुड़ पुराण में मिलता है वर्णन

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मृतक का पिंडदान करने का वर्णन गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प के अध्याय में मिलता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।