Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    गरुड़ पुराण: श्‍मशान घाट ले जाने से पहले 'शव' को आखिर क्‍यों बांधकर रखा जाता है?

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 01:35 PM (GMT+05:30)

    मृत्यु के बाद शरीर से आत्मा निकल जाती है, जिससे वह पंचतत्व में विलीन होने लगता है। शव को बांधने का मुख्य उद्देश्य नकारात्मक शक्तियों या बुरी आत्माओं क ...और पढ़ें

    शव के पैर और हाथ बांध दिए जाते हैं  (Picture Credit- AI Generated)

    शव के पैर और हाथ बांध दिए जाते हैं (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. आत्मा को शरीर में पुनः प्रवेश से रोकने हेतु।

    2. नकारात्मक शक्तियों को शव में प्रवेश से बचाने के लिए।

    3. गरुड़ पुराण में अंतिम संस्कार के नियम वर्णित।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मृत्‍यु जीवन का अटल सत्‍य है। जिसने जन्‍म लिया है, उसे एक दिन मरना ही है। लेकिन मरने के बाद शरीर से जब आत्मा बाहर आती है, तो उसे यकीन नहीं होता है कि अब उसका शरीर बस एक शव है। अपने शरीर के अंदर वह बार-बार प्रवेश करने का प्रयास करती है।

    गरुड़ पुराण में अंतिम संस्कार से पूर्व शव को बांधने और श्‍मशान ले जाने के नियम बताए गए हैं। यह जानकारी प्रेत कल्प के दसवें अध्याय में श्लोक संख्या लगभग 11-15 के बीच दी गई है। इसमें मरने के बाद व्यक्ति के अंग बांधने का महत्व बताया गया है।

    शव के हाथ और पैर क्‍यों बांधे जाते हैं?

    मानव शरीर में 9 मुख्‍य प्राकृतिक प्रवेश द्वार होते हैं। दो आंख, दो कान, दोनों नाक के छेद, एक मुख, मूत्रद्वार, मलद्वार। व्‍यक्ति के प्राण भी इनमें से किसी एक द्वार से निकलते हैं। गरुड़ पुराण में साफ-साफ लिखा है कि जब आत्‍मा शरीर से बाहर आती है, तो उसका आकार अंगूठे की पोर जितना छोटा हो जाता है।

    shav(Picture Credit- AI Generated)

    बाहर आकर सबसे पहले तो अपने शरीर को बेजान देखना उसके लिए दुखद होता है। शरीर को मोह खत्‍म भी नहीं होता है कि अपने परिजनों को दुखी देख, उसे और भी ज्‍यादा कष्‍ट होने लगता है।ऐसे में वो शरीर के इन नौ प्रवेश द्वारों से अंदर जाने का प्रयास करती है।

    खबरें और भी

    यही कारण है कि शव के पैर और हाथ बांध दिए जाते हैं, ताकि मल और मूत्र द्वार बंद हो जाए। वहीं शव का मुंह और आंख बंद कर दिया जाता है। नाक और कान में रूई लगा दी जाती है। इन सभी क्रियाओं के बारे में गरुड़ पुराण में बहुत ही विस्तार से बताया गया है।

    नकारात्‍मक ऊर्जाओं को हो सकता है वास

    मृतक के शरीर को बांधा न जाए, तो उसके आस-पास मौजूद नकारात्‍मक शक्तियां उसके शरीर में प्रवेश करने का प्रयास करने लगती हैं। ययही वजह है कि गरुड़ पुराण में श्‍मशान यात्रा से पहले एक पल के लिए भी शव को अकेला छोड़ने के लिए मना किया गया है। दरअसल, आत्‍मा का अपने शरीर से मोह तब तक खत्‍म नहीं होता है, जब तक उसे अग्नि के सुपुर्द न कर दिया जाए। यदि परिजन शव को अकेला छोड़ देते हैं, तो शव के पास मंडरा रही नकारात्‍मक शक्तियों से आत्‍मा खुद को असुरक्षित महसूस करती है।

    अतः शरीर के त्याग के बाद आत्मा उसमें दोबारा प्रवेश न कर पाए इसलिए मृतक के शरीर को बांध दिया जाता है।

    यह भी पढ़ें- श्मशान घाट पहुंचने से पहले क्यों दिया जाता है अर्थी को विश्राम? गरुड़ पुराण में छिपा है इस परंपरा का असली रहस्य

    यह भी पढ़ें- नीम चबाना और घर का खाना न खाना: श्मशान से लौटने के बाद के 4 कड़े नियम, जिनका जिक्र गरुड़ पुराण में भी है

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।