पिछले जन्म के कौन-से कर्म बनते हैं अकाल मृत्यु का कारण? गरुड़ पुराण में छिपा है जवाब और उपाय
गरुड़ पुराण के अनुसार, अकाल मृत्यु वह है जब आत्मा समय से पहले शरीर त्यागने के बाद भी अपना जीवनकाल पूरा करने के लिए संसार में रहती है। जानिए मुक्ति के ...और पढ़ें

अकाल मृत्यु क्या है? (Picture Credits- AI Image)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। इस दुनिया में जन्म लेने वाले प्रत्येक प्राणी की मृत्यु तय है। कई लोग जीवन का लंबा अनुभव लेने के बाद देह त्यागते हैं, जबकि कई लोग असमय ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। मनुष्य का जीवन 4 फेज से मिलकर बना होता है, जिसमें पहला फेज शिशु, दूसरा किशोर, तीसरा प्रौढ़ और चौथा वृद्धावस्था है।
हिंदू पुराणों के मुताबिक, वो मनुष्य जिसकी मौत समय से पहले ही हो जाती है, लेकिन शरीर त्यागने के बाद भी उसकी आत्मा इस लोक का त्याग नहीं करती है, बल्कि अपना जीवनकाल पूरा करने के लिए इस संसार में बनी रहती है, उसे ही अकाल मृत्यु कहा जाता है।

कौन-सी मौत अकाल मृत्यु का कारण बनती है?
गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की मौत एक्सीडेंट, आग में जलकर, पानी में डूबकर, सांप के काटने से, किसी जंगली जानवर के घातक हमले से या आत्महत्या द्वारा होती है, उसे अकाल मृत्यु कहा जाता है।
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि, मनुष्य अपने पिछले जन्म के शुभ या अशुभ कर्मों का फल लेकर आता है और उसी कर्म संबंध के कारण उसे अचानक कोई विपत्ति घेर लेती है। जब मनुष्य के पाप कर्मों का घड़ा भर जाता है, तो व्यक्ति की जानकारी के बिना ही बलवान काल जिसे मृत्यु का दूसरा नाम भी कहा जाता है, उसे एक सांप की तरह आकर डस लेता है।
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किन कर्मों से अकाल मृत्यु होती है?
गरुड़ पुराण के कर्म विपाक अध्याय में साफ-साफ लिखा है कि, जो व्यक्ति दूसरों के साथ क्रूरता और अन्याय करता है, उसकी मौत भी क्रूर तरीके से होती है। जो किसी के घर या जंगल में आग लगाता है, वह अगले जन्म में अग्नि में जलाया जाता है।
इसके अलावा जो दूसरों को जहर (विष) देता है या हिंसक जानवरों की तरह व्यवहार करता है, वह अगले जन्म में सांप के काटने, चोर-डाकुओं द्वारा हत्या या जंगल में शेर आदि हिंसक जानवरों के द्वारा अकाल मौत मरता है।
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अकाल मृत्यु से मुक्ति का उपाय
गरुड़ पुराण के अनुसार अकाल मौत मरने वाली आत्माएं अक्सर भूत-प्रेत बनकर भटकती है। ऐसी आत्माओं की शांति और उद्धार के लिए परिजनों को खासतौर से नारायण बलि का अनुष्ठान करना चाहिए।
ऐसा करने से मृत व्यक्ति की आत्माएं सभी पापों से मुक्त होकर स्वर्ग को प्राप्त होती है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।