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    Garuda Purana: भूलकर भी न खाएं इन लोगों के घर खाना, वरना भोगने पड़ सकते हैं भारी कष्ट

    Updated: Thu, 15 Jan 2026 01:30 PM (IST)

    गरुड़ पुराण के अनुसार, कुछ लोगों के घर भोजन करना आपके दुर्भाग्य का कारण बन सकता है। चलिए जानते हैं वो कौन लोग हैं, जिनके हाथ का अन्न आपके आने वाले जीव ...और पढ़ें

    गरुड़ पुराण की सीख (Image Source: Freepik)

    गरुड़ पुराण की सीख (Image Source: Freepik)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गरुड़ पुराण सनातन धर्म के उन महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है, जो हमें जीवन जीने की सही कला और नैतिक मूल्यों के बारे में बताता है। अगर हम गरुड़ पुराण की सीख को अपने जीवन में उतार लेते हैं, तो कई आने वाली समस्याओं से बच सकते हैं। अक्सर हम किसी के भी घर जाकर भोजन कर लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत व्यक्ति के हाथ का बना या उसकी कमाई से आया भोजन आपके स्वभाव और भाग्य को बिगाड़ सकता है?

    गरुड़ पुराण में ऐसे 10 लोगों का जिक्र है, जिनके घर या जिनके द्वारा दिया गया भोजन कभी ग्रहण नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं इसके पीछे के आध्यात्मिक और व्यावहारिक कारण।

    किन लोगों के घर भोजन करने से बचना चाहिए?

    1. अपराधी या चोर: जो व्यक्ति गलत रास्ते से धन कमाता है, उसके अन्न में उसकी नकारात्मक ऊर्जा और पाप का अंश होता है। ऐसा भोजन करने से व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट हो सकती है और वह भी गलत कामों की ओर आकर्षित हो सकता है।

    2. सूदखोर या ब्याजखोर: गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाकर अत्यधिक ब्याज वसूलता है, उसके यहाँ भोजन करना अनुचित है। दूसरों के आंसू और दुख की कमाई से बना भोजन मन में अशांति पैदा करता है।

    Garud Puran

    3. गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति: इसके पीछे एक वैज्ञानिक तर्क भी है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से किसी छूत की बीमारी या गंभीर रोग से पीड़ित है, तो उसके घर भोजन करने से संक्रमण का खतरा रहता है।

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    4. अत्यधिक क्रोधी व्यक्ति: कहा जाता है कि 'जैसा अन्न, वैसा मन'। क्रोध की अवस्था में बनाया गया या परोसा गया भोजन तामसिक गुणों से भरपूर होता है, जिससे खाने वाले के स्वभाव में भी चिड़चिड़ापन आ जाता है।

    5. चरित्रहीन व्यक्ति: चरित्रहीन व्यक्ति के घर का अन्न मानसिक अशुद्धि लाता है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति की संगति और भोजन दोनों ही आध्यात्मिक पतन का कारण बनते हैं।

    6. निर्दयी या नशीले पदार्थों का व्यापार करने वाले: जो लोग बेजुबान जानवरों को सताते हैं या समाज में नशा बेचकर घर चलाते हैं, उनके घर का भोजन आपके पुण्य कर्मों को क्षीण कर सकता है।

    भोजन का हमारे जीवन पर प्रभाव

    शास्त्रों के अनुसार, अन्न सिर्फ शरीर को पोषण नहीं देता, बल्कि यह हमारी चेतना का निर्माण भी करता है। जब हम किसी नेक इंसान के घर प्रेम से बना भोजन करते हैं, तो हमारे भीतर सकारात्मक विचार आते हैं। वहीं, अधर्म की कमाई का अन्न हमारे विचारों को दूषित कर देता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।