गरुड़ पुराण: इन कर्मों को करने वाले लोगों को मृत्यु के बाद मिलती है प्रेत योनि, कभी नहीं मिलती मुक्ति
गरुड़ पुराण के अनुसार, कुछ विशेष कर्मों को करने वाले व्यक्ति को मृत्यु के बाद प्रेत योनि प्राप्त होती है, जिससे मुक्ति मिलना कठिन हो जाता है।

ये कर्म आपको मृत्यु के बाद प्रेत योनि में धकेल सकते हैं । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथ गरुड़ पुराण में जीवन, मृत्यु, कर्म, पुनर्जन्म और मृत्यु के बाद से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताओं का वर्णन मिलता है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है। फिर चाहे वो जीवन रहते मिले या फिर मृत्यु के बाद मिले या अगले जन्म में मिले।
अच्छे कर्मों का शुभ फल और पापपूर्ण कर्मों का नकारात्मक परिणाम भुगतना पड़ता है। इसी क्रम में गरुड़ पुराण में कुछ ऐसे कर्मों का उल्लेख भी मिलता है, जिन्हें करने वाले व्यक्ति को मरने के बाद प्रेत योनि में जाना पड़ता है। आइए जानते हैं उन कर्मों के बारे में और प्रेत योनि से मुक्ति से जुड़ी मान्यताओं के बारे में।
बिना कारण अपनों का त्याग करना
गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति बिना किसी उचित कारण के अपनी पत्नी, पुत्री, बहू, माता-पिता या बहन का त्याग करता है, उसे मृत्यु के बाद प्रेत योनि मिलती है। हिंदू धर्म में कहा गया है कि व्यक्ति को परिवार का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा माना गया है कि जो भी व्यक्ति ऐसा करता है, उसके लिए माना जाता है कि वह अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहा है। इसलिए अपने परिवार के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी को निभाना शास्त्रों में महत्वपूर्ण बताया गया है।
धोखाधड़ी और चोरी करना
दूसरों के साथ धोखा करना, मित्रों का धन हड़पना या किसी कमजोर व्यक्ति के अधिकार छीनना भी धार्मिक लिहाज से एक गंभीर अपराध बताया गया है। ऐसे कर्मों को करने वाले लोगों को भी प्रेत योनि में जाना पड़ता है। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के आभूषण या संपत्ति को गलत तरीके से छीनना या हड़प लेना भी पापपूर्ण माना जाता है गया है।
पितरों और ब्राह्मणों का अनादर
गरुड़ पुराण में पितरों के प्रति सम्मान और श्राद्ध कर्म को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। जो व्यक्ति अपने पितरों को याद नहीं करता है और उनका श्राद्ध नहीं करता, उसे जीवन भर कष्टों का सामना करना पड़ता है और मरने के बाद वो प्रेत योनी में जाता है।ऐसा भी माना जाता है कि, जो भी व्यक्ति ब्राह्मणों का अपमान करता है, वो भी जीवन में कभी सुख नहीं पाता है और उसे अगला जन्म प्रेत योनी में मिलता है।
माता-पिता और गुरु का अपमान
माता-पिता और गुरु को भगवान से भी ऊपर का दर्जा दिया गया है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि माता-पिता और गुरु का अपमान घोर पाप है। ऐसा करने वाले व्यक्ति को जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता है और ऐसे लोगों को मरने के बाद प्रेत योनी में जन्म मिलता है। इसलिए शास्त्रों और पुराणों में बड़ों का सम्मान, संयम और परिवार के प्रति जिम्मेदारी रखने पर जोर दिया गया है।
धर्म और परोपकार से विमुख होना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति धर्म, परोपकार और सदाचार से पूरी तरह मुंह मोड़ लेता है, वह मनुष्य नहीं दानव हो जाता है। ऐसे लोगों को उनके पापपूर्ण कर्मों का फल मृत्यु से पहले और बाद में भी मिलता है। गरुड़ पुराण मनुष्य को सत्य, दान, संयम और अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है।
अत: हमें पुराण में बताई गई इन सभी मान्यताओं का पालन करते हुए अपना जीवन परिवार के प्रति जिम्मेदारी को निभाते हुए और सभी आदर-सम्मान करते हुए बिताना चाहिए।
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