अकाल मृत्यु या दुर्घटना में मृत व्यक्ति का श्राद्ध कब करना चाहिए? गरुड़ पुराण के रहस्य को समझें
गरुड़ पुराण के अनुसार, अकाल मृत्यु या दुर्घटना में मृत व्यक्तियों का श्राद्ध पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि को करना ...और पढ़ें

अकाल मृत्यु में मृत पूर्वजों का श्राद्ध कब करें (Picture Credit: AI Generated)
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अकाल मृत्यु का श्राद्ध पितृ पक्ष चतुर्दशी तिथि पर करें।
गरुड़ पुराण के अनुसार, यह आत्माओं को शांति और मुक्ति देता है।
वर्ष 2026 में चतुर्दशी श्राद्ध 9 अक्टूबर को किया जाएगा।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दौरान मृत पूवजों का श्राद्ध कर्म किया जाता है। इस दौरान श्राद्ध और तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। हर साल श्राद्ध का आरंभ भाद्रपद पूर्णिमा से होता है और यह अश्विन अमावस्या तक चलता है।
इस साल श्राद्ध का आरंभ 26 सितंबर,पूर्णिमा से हो रहा है और इसका समापन सर्वपितृ अमावस्या को यानी 10 अक्टूबर को होगा। इस दौरान सभी पूर्वजों का श्राद्ध कर्म किया जाएगा।
आमतौर पर श्राद्ध हमेशा उसी तिथि में किया जाता है जिसमें पूर्वज की मृत्यु हुई होती है। ऐसे में एक सवाल यह आता है कि अगर किसी की मृत्यु दुर्घटना में हुई है या काल मृत्यु हुई है तो उसका श्राद्ध आपको किस तिथि में करना चाहिए? आइए आपको बताते हैं इसके नियमों के बारे में।
अकाल मृत्यु क्या होती है?
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जब किसी व्यक्ति की दुर्घटना में या किसी अन्य कारण से असमय मृत्यु हो जाती है, तो उसे अकाल मृत्यु कहा जाता है।
ऐसे लोगों की आत्मा शरीर त्यागने के बाद भी मुक्त नहीं होती है और इधर-उधर भटकती रहती है। गरुण पुराण के सिंहावलोकन अध्याय में अकाल मृत्यु के बारे में बताया गया है और यह भी लिखा है कि यदि व्यक्ति दुर्घटना में मरता है या फिर आत्महत्या करता है, तो उसे भी अकाल मृत्यु कहा जाता है। किसी पशु के आघात से या असमय बीमारी से मरना भी अकाल मृत्यु में ही गिना जाता है।
अकाल मृत्यु होने पर कब करना चाहिए श्राद्ध?
जिन लोगों की अकाल मृत्यु होती है और उनकी मृत्यु तिथि के बारे में पता नहीं होता हैं, उन सभी पूर्वजों का श्राद्ध पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है।
गरुड़ पुराण में ऐसे लोगों के श्राद्ध के लिए यही तिथि उचित बताई गई है और इससे ऐसे सभी पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिलती है। जब आप ऐसे पूर्वजों का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि में करते हैं तो उनकी आत्मा को शांति मिलती है। यही नहीं इस दिन किए गए श्राद्ध से मृत पूर्वजों का विशेष आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। इस दिन किए गए श्राद्ध से उनको अकाल मृत्यु यानी कि प्रेत योनि में भटकने से मुक्ति मिल जाती है और विशेष आशीर्वाद मिलता है।
पितृ पक्ष 2026 में कब है चतुर्दशी तिथि?
इस साल चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध 9 अक्टूबर, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा, जिसकी अवधि 47 मिनट है। इसके बाद रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:31 बजे से 1:18 बजे तक रहेगा, जबकि अपराह्न काल दोपहर 1:18 बजे से 3:38 बजे तक रहेगा।
चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर 2026 की रात 10:15 बजे से शुरू होकर 9 अक्टूबर 2026 की रात 9:35 बजे तक रहेगी। इस दिन उन सभी पूर्वजों का श्राद्ध करना चाहिए जिनकी मृत्यु असमय हुई है।
अगर आप भी किसी ऐसे व्यक्ति का श्राद्ध करते हैं जिसकी मृत्यु अकाल हुई है , तो उसके लिए पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि होती है।
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