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क्या आप जानते हैं मृत्यु के बाद पैरों के अंगूठे क्यों बांधे जाते हैं? गरुड़ पुराण में छिपा है इसका गहरा रहस्य

Published: Tue, 22 Sep 2026 02:31 PM (IST)

गरुड़ पुराण के अनुसार, अंतिम संस्कार से पहले मृतक के पैरों के अंगूठे बांधे जाते हैं ताकि आत्मा शरीर में ...और पढ़ें

हिंदू अंतिम संस्कार में अंगूठे बांधने की परंपरा क्या है? (AI-Generated Image)

हिंदू अंतिम संस्कार में अंगूठे बांधने की परंपरा क्या है? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की यात्रा के बारे में विस्तार से बताया गया है। आज के समय में कई लोग गरुड़ पुराण में छिपे रहस्यों से अनजान हैं। व्यक्ति की मृत्यु के बाद विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाता है। इससे मृतक की आत्मा को शांति प्राप्त होती है। अक्सर लोग मृत्यु के बाद शव के पैरों के अंगूठों को धागे से बांध देते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है? अगर नहीं, तो आइए इस आर्टिकल में हम आपको इसके पीछे के रहस्य के बारे में बताते हैं।

मृतक के पैरों के अंगूठों को बांधने की क्या है वजह?

गरुड़ पुराण के अनुसार, जब व्यक्ति की सांसें पूरी हो जाती हैं, तो उसके पैरों के दोनों अंगूठों को बांध दिया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि आत्मा दोबारा शरीर में न आ सके। मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद भी आत्मा का अपने शरीर से मोह रहता है और वह शरीर में लौटने की कोशिश करती है।

ऐसा इसलिए भी किया जाता है ताकि शरीर को स्थिर रखा जा सके। साथ ही आत्मा के निकलने के बाद शरीर खाली हो जाता है और इसमें नकारात्मक शक्तियों के प्रवेश का खतरा बना रहता है। अंगूठों को बांधने से शरीर के सूक्ष्म ऊर्जा द्वार बंद हो जाते हैं, जिससे कोई भी बाहरी शक्ति शरीर का उपयोग नहीं कर पाती।

विधि-विधान से होता है अंतिम संस्कार

व्यक्ति के शरीर से अंतिम सांस निकल जाने पर उसे जमीन पर लिटा दिया जाता है। इस दौरान मृतक का सिर दक्षिण दिशा की तरफ रखा जाता है, क्योंकि यह दिशा मृत्यु के देवता यम की मानी जाती है। आत्मा की शांति के लिए मुख में गंगाजल, तुलसी का पत्ता और स्वर्ण रखा जाता है। इसके बाद मृतक के शव को स्नान कराया जाता है और नए कपड़े पहनाए जाते हैं। अगर किसी सुहागिन महिला की मृत्यु हुई है, तो उसे पूरे शृंगार के साथ विदा किया जाता है।

इसके बाद मृतक के लिए बांस और कुश घास से एक अर्थी तैयार की जाती है। शव को उस पर लिटाकर कफन से अच्छी तरह ढक दिया जाता है। यात्रा के समय शरीर सुरक्षित रहे। इसलिए उसे सूत के धागों से अर्थी के साथ बांध दिया जाता है और अंतिम यात्रा निकालकर विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।