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    क्या आपके पास भी हैं मृतक की ये चीजें? गरुड़ पुराण के अनुसार आज ही जान लें ये जरूरी नियम

    Updated: Sat, 02 May 2026 05:52 PM (GMT+05:30)

    गरुड़ पुराण के अनुसार, मृतक की वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए या नहीं? आइए इस आर्टिकल में जानते हैं। ...और पढ़ें

    गरुड़ पुराण: मृतक की इन 3 चीजों का भूलकर भी न करें इस्तेमाल। Ai Generated Image

    गरुड़ पुराण: मृतक की इन 3 चीजों का भूलकर भी न करें इस्तेमाल। Ai Generated Image

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के 18 पुराणों में गरुड़ पुराण का विशेष महत्व है। जहां अन्य पुराण जीवन जीने के तरीके और देव भक्ति की महिमा गाते हैं, वहीं गरुड़ पुराण मृत्यु और उसके बाद की स्थितियों के बारे में बताता है। अक्सर लोग अपने किसी प्रिय की मृत्यु के बाद उनकी यादों को संजोने के लिए उनके कपड़े, गहने या अन्य सामान अपने पास रख लेते हैं।

    लेकिन क्या आप जानते हैं कि गरुड़ पुराण में मृतक की वस्तुओं के उपयोग को लेकर कुछ कठिन नियम बताए गए हैं? माना जाता है कि इन नियमों की अनदेखी करने से घर में नकारात्मकता और मानसिक अशांति आ सकती है।

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    मृतक के कपड़ों का क्या करें?

    गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके शरीर से मोह तो छूट जाता है, लेकिन उसकी वस्तुओं में उनकी ऊर्जा और मोह कुछ समय तक बना रहता है। इसलिए मृतक के कपड़ो का उपयोग करने से बचना चाहिए। अगर आप मृतक के कपड़े पहनते हैं, तो उनकी ऊर्जा आपके शरीर और मन को प्रभावित कर सकती है, जिससे आपको मानसिक तनाव, डरावने सपने या भय का अनुभव हो सकता है।

    नियम - मृतक के कपड़ों को दान कर देना सबसे अच्छा माना गया है। इससे मृतक की आत्मा को शांति मिलती है और मोह का बंधन टूटता है।

    गहने और आभूषण से लेकर सावधानी

    • मृतक के गहनों को लेकर नियम थोड़े अलग हैं। अगर आभूषण सोना, चांदी के बने होते हैं, तो रख सकते हैं।
    • अगर मृतक ने अपनी मृत्यु से पहले मर्जी से अपने गहने किसी को उपहार के तौर पर दिए हैं, तो उनका उपयोग किया जा सकता है।
    • अगर गहनों के साथ मृतक का गहरा मोह था, तो उन्हें सीधे पहनने के बजाय गलाकर नए आभूषण बनवाना या उनकी शुद्धिकरण पूजा करवाना जरूरी होता है।

    अन्य वस्तुएं

    मृतक की घड़ी को समय का प्रतीक माना जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, मृतक की घड़ी का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह उस व्यक्ति के समय से जुड़ी होती है। इसे या तो संभालकर रखा जा सकता है या इसे भी दान कर देना चाहिए।

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    मृतक की यादों को कैसे संजोएं?

    गरुड़ पुराण के अनुसार, मृतक के प्रति सम्मान उनकी वस्तुओं को रखने में नहीं, बल्कि उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने और उनके नाम पर दान-पुण्य करने में है। ऐसे में उनकी वस्तुओं को जरूरतमंदों को दान कर दें। इससे मृतक की आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही मोक्ष मिलता है।

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।