Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्र में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना खंडित हो सकती है आपकी साधना
गुप्त नवरात्र की अवधि में मुख्य रूप से 10 महाविद्याओं की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान की गई साधना से जातक को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति तो ...और पढ़ें

Magh Gupt Navratri 2026
HighLights
19 से 28 जनवरी तक मनाए जाएंगे गुप्त नवरात्र
साधना की गोपनीयता बनाए रखना है जरूरी
पूर्ण फल प्राप्ति के लिए जरूर करें इन नियमों का पालन
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। इस साल माघ गुप्त नवरात्र की शुरुआत 19 जनवरी से होगी, जो 28 जनवरी तक चलने वाले हैं। गुप्त नवरात्र की पूजा मुख्य रूप से तंत्र साधना करने वाले लोगों या फिर अघोरियों द्वारा की जाती है।
इसके साथ ही आमजन भी इस अवधि में माता रानी की विधिवत पूजा-अर्चना से सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति कर सकते हैं। गुप्त नवरात्र की पूजा का फल आपको तभी मिलता है जब आप इन नियमों का ध्यान रखें। चलिए जानते हैं इस बारे में।
ये है सबसे बड़ा नियम
गुप्त नवरात्र, जैसा कि नाम से ही जाहिर है, इस साधना को गुप्त रूप से किया जाता है। ऐसे में गुप्त नवरात्र का सबसे बड़ा नियम 'गोपनीयता'। अपनी पूजा, मंत्र या संकल्प के बारे में किसी को भी न बताएं। माना जाता है कि यदि इसे सार्वजनिक तरीके से किया जाए, तो वह पूजा निष्फल हो जाती है।
इसके साथ ही अगर आपने गुप्त नवरात्र के दौरान घर में अखंड ज्योति जलाई है, तो घर को कभी भी खाली न छोड़ें और ज्योति की शुद्धता का भी पूरा ध्यान रखें।

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न करें ये गलतियां
गुप्त नवरात्र में की गई पूजा का फल साधक को पूर्ण रूप से तभी मिलता है, जब साधक तन, मन और विचारों से शुद्ध रहे। ऐसे में साधक को अपने तन और मन दोनों की स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। सुबह स्नान के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनें और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसके साथ ही पूजा के दौरान मन में किसी भी तरह का बुरा या नकारात्मक विचार न लाएं। इस साधना में किसी का अपमान करना, झूठ बोलना या क्रोध करना वर्जित है।
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इन चीजों से बनाएं दूरी
गुप्त नवरात्र के 9 दिनों की अवधि में साधक को मांसाहार, शराब, लहसुन-प्याज आदि का पूरी तरह से त्याग करना चाहिए। इसके साथ ही ब्रह्मचर्य के नियमों का भी मुख्य रूप से पालन करना चाहिए। इन नियमों की अनदेखी करने पर देवी मां रुष्ट हो सकती हैं, जिससे आपको कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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