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    Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर पितरों को कैसे करें तृप्त? जानें तर्पण का सबसे सरल तरीका

    Updated: Fri, 16 Jan 2026 03:20 PM (GMT+05:30)

    Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या सनातन परंपरा में पितृ तृप्ति और आत्म शुद्धि का अत्यंत पवित्र दिन है, जो 2026 में 18 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन गंग ...और पढ़ें

    मौनी अमावस्या पर करें पितरों का तर्पण (Image Source: AI-Generated)

    मौनी अमावस्या पर करें पितरों का तर्पण (Image Source: AI-Generated)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। सनातन परंपरा में मौनी अमावस्या को पितृ तृप्ति और आत्म शुद्धि से जुड़ा अत्यंत पवित्र दिन माना गया है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस तिथि पर गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान, मौन व्रत, दान पुण्य और पितरों के निमित्त तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर किया गया तर्पण पितरों को संतोष प्रदान करता है और वंश में सुख शांति बनाए रखता है। शास्त्रों में वर्णित विधि अनुसार तर्पण करने से पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग खुलता है। इसी कारण यह तिथि पितृ कर्म के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

    तर्पण के लिए तैयारी और संकल्प विधि

    मौनी अमावस्या के दिन तर्पण से पहले शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र जल से स्नान करना उत्तम माना गया है। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर शांत स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। तर्पण से पहले मन में पवित्र भावना रखते हुए पितरों के स्मरण का संकल्प लिया जाता है। हाथ में जल, तिल और कुश लेकर पितरों का ध्यान किया जाता है। संकल्प के समय अपने गोत्र और पितरों के नाम का स्मरण करना शुभ माना जाता है। यह तैयारी तर्पण को भावपूर्ण बनाती है और श्रद्धा के साथ किया गया कर्म पितरों तक पहुंचता है।

    मौनी अमावस्या पर तर्पण करने की विधि (Pitru Tarpan Vidhi)

    तर्पण के लिए सामान्यतः जल, काले तिल, कुश और अक्षत का प्रयोग किया जाता है। तर्पण करते समय जल को हथेली में लेकर उंगलियों के बीच से धीरे धीरे धरती पर छोड़ा जाता है। प्रत्येक तर्पण के साथ पितरों के प्रति आभार भाव रखा जाता है। धार्मिक मत के अनुसार तीन बार तर्पण करना उत्तम माना गया है। इस दौरान मन शांत और मौन में रहना विशेष फलदायी होता है। तर्पण के समय पितृ सूक्त या पितृ चालीसा का पाठ करने से कर्म की प्रभावशीलता बढ़ती है। यह विधि पितरों को तृप्त करती है और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने का माध्यम बनती है।

    Pitru Dosha

    (Image Source: Freepik)

    तर्पण के लाभ और धार्मिक मान्यता

    शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या पर किया गया तर्पण अनेक प्रकार के आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है। मान्यता है कि इस दिन पितर पृथ्वी लोक के समीप होते हैं और संतानों के किए गए कर्म को स्वीकार करते हैं। तर्पण से पितृ दोष में कमी आती है और परिवार में सुख समृद्धि का वास होता है। साथ ही यह कर्म वंश परंपरा को मजबूत करता है। धार्मिक दृष्टि से यह माना जाता है कि पितरों की कृपा से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इस प्रकार मौनी अमावस्या पर तर्पण केवल एक विधि नहीं, बल्कि पितरों के प्रति सम्मान और कर्तव्य का प्रतीक है।

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    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।