गुरु पूर्णिमा सिर्फ हिंदुओं का ही पर्व नहीं, बौद्ध और जैन धर्म में भी इसका खास महत्व?
गुरु पूर्णिमा हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों में गुरुओं के सम्मान का पर्व है, जो अज्ञानता को दूर कर ज्ञान का संचार करता है। ...और पढ़ें

हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म में गुरु पूर्णिमा का महत्व (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
गुरु पूर्णिमा हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों में मनाई जाती है।
हिंदू धर्म में यह आदि गुरु भगवान शिव को समर्पित है।
बौद्ध बुद्ध के प्रथम उपदेश, जैन तीर्थंकरों का सम्मान करते हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गुरु पूर्णिमा सिर्फ हिंदू धर्म में ही नहीं मनाया जाता है, बल्कि बौद्ध और जैन धर्म में भी इसकी काफी मान्यता है। एक ऐसा दिन जब दुनिया भर के लाखों भक्त अपने गुरुओं (शिक्षक, माता-पिता या कोई भी मार्गदर्शक)का सम्मान करने के साथ उनकी शिक्षाओं की कद्र करते हैं। इस साल गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई, बुधवार के दिन मनाया जाएगा।
गुरु शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है। 'गु' जिसका मतलब है अंधकार और अज्ञान और 'रु' जिसका मतलब है प्रकाश या ज्ञान। असल मायने में जो अपने शिष्य के जीवन से अंधकार या अज्ञान को दूर करके ज्ञान का संचार प्रवाहित करता है।
हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का अर्थ
हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें प्रथम गुरु या आदि गुरु के नाम से जाना जाता है। उन्होंने ऋषि पतंजलि और अन्य महान ऋषियों को योग और आध्यात्मिक जगत से जुड़ा ज्ञान प्रदान किया था।
भक्त इस मौके पर पूजा अर्चना करने के साथ गुरुओं को फूल, फल और अगरबत्ती अर्पित करते हैं और ज्ञान एवं समृद्धि के लिए आशीर्वाद की कामना करते हैं।

बौद्ध धर्म में गुरु पूर्णिमा
बौद्धों के लिए भी गुरु पूर्णिमा काफी ज्यादा महत्व है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि, इसी दिन भगवान बुद्ध ने ज्ञान हासिल करने के बद अपना पहला उद्देश्य दिया था। उन्होंने चार आर्य सत्यों और अष्टांगिक मार्ग की शिक्षाओं का भी प्रचार-प्रसार किया, जो बौद्ध दर्शन की नींव है।
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इस दिन बौद्ध भगवान बुद्ध से जुड़ी शिक्षाओं के सम्मान में प्रार्थना करने के साथ मंत्रों का जाप और ध्यान करते हैं। यह कृतज्ञता और आत्मचिंतन से भरा दिन है, जो जीवन में ज्ञान, करुणा और सजगता के महत्व का प्रतीक है।
जैन धर्म में गुरु पूर्णिमा
जैन धर्म में गुरु पूर्णिमा तीर्थंकरों को समर्पित है, जिन्हें परम आध्यात्मिक गुरु का रूप माना जाता है। भक्त अपने गुरुओं का आदर करने के साथ भगवान महावीर की शिक्षाओं का मन, दान और निस्वार्थ भाव से सेवा करके इस दिन को मनाते हैं।
इस दिन खासतौर पर जैन अनुष्ठानों में उपवास, ध्यान और आध्यात्मिक विकास एवं मुक्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है। गुरु पूर्णिमा जैनियों के लिए आत्म-अनुशासन और अपने गुरु के लिए भक्ति के जरिए अपनी आत्मा को शुद्ध करने पर जोर देता है।
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