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    क्या आप भी सफर में साथ रखते हैं 'हनुमान चालीसा', तो भूलकर भी न करें ये गलतियां

    Updated: Fri, 03 Apr 2026 10:00 AM (IST)

    कई लोग यात्रा के दौरान हनुमान चालीसा साथ रखते हैं, लेकिन क्या ऐसा करना सही है। चलिए जानते हैं इस बारे में। ...और पढ़ें

    यात्रा में हनुमान चालीसा साथ ले जाने का सही तरीका (AI Generated Image)

    यात्रा में हनुमान चालीसा साथ ले जाने का सही तरीका (AI Generated Image)

    HighLights

    1. यात्रा में हनुमान चालीसा ले जाने के बताए गए हैं नियम

    2. पाठ से पहले जरूर करें भगवान श्रीराम का आह्वान

    3. इन गलतियों के कारण नहीं मिलता पाठ का पूरा लाभ

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज के भागदौड़ भरे जीवन में कई लोग अपने बिजी शेड्यूल के चलते जेब या बैग में हनुमान चालीसा रखते हैं, ताकि समय मिलने पर या काम पर जाते समय वह इसका पाठ कर सकें। शास्त्रों में हनुमान चालीसा के पाठ के जुड़े कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है।

    तभी आपको इसके लाभ मिल सकते हैं। आइए जानते हैं सफर में हनुमान चालीसा ले जाने का सही तरीका और इसके पाठ से जुड़े जरूरी नियम।

    क्या सफर में हनुमान चालीसा ले जाना सही

    आप यात्रा में हनुमान चालीसा साथ रख सकते हैं, लेकिन इस दौरान इसकी पवित्रता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। हनुमान चालीसा को आप एक साफ लाल या पीले रेशमी कपड़े में लपेटकर रख सकते हैं। यदि आप यात्रा के दौरान शौचालय जाते हैं, तो बिना हाथ धोए या अशुद्ध अवस्था में चालीसा को स्पर्श न करें। जहां मांसाहारी भोजन बन रहा हो या रखा हो, वहां भी हनुमान चालीसा को न लेकर जाएं।

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    (AI Generated Image)

    पाठ का सही तरीका

    हनुमान चालीसा का पाठ केवल पढ़ना नहीं, बल्कि एक साधना है। ऐसे में पाठ से पहले भगवान श्रीराम का आह्वान करें, क्योंकि राम नाम के बिना हनुमान जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। कभी भी सीधे चौपाइयां न पढ़ें, शुरुआत में दिए गए 'श्रीगुरु चरन सरोज रज...' दोहे का पाठ जरूर करें है। हनुमान चालीसा का पाठ 1, 3, 7, 9 या 11 बार करना शुभ माना गया है। पाठ के बीच में किसी से बात न करें और एकाग्रता बनाए रखें।

    इन गलतियों से बचें

    • हनुमान चालीसा को कभी भी चमड़े से बनी चीज जैसे पर्स या बैग आदि में न रखें।
    • हनुमान चालीसा को किसी गंदी पॉलिथीन या गंदे कपड़े में लपेटकर न रखें।
    • हनुमान चालीसा का पाठ बहुत तेज आवाज में न करें। स्वर हमेशा मध्यम और मधुर होना चाहिए।
    • हनुमान जी के भक्तों को तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा आदि का पूरी तरह के त्याग कर देना चाहिए, अन्यथा पाठ का फल निष्फल हो जाता है।
    • यदि यात्रा में शारीरिक शुद्धता संभव नहीं है, तो पुस्तक छूने के बजाय मन ही मन या फोन पर 'हनुमान चालीसा' सुन सकते हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।