आखिर क्या हैं बजरंगबली की वो 8 सिद्धियां, जो उन्हें बनाती हैं अजेय?
हनुमान जन्मोत्सव 2026: क्या आप जानते हैं हनुमान जी की उन 8 दिव्य सिद्धियों का रहस्य? पढ़ें माता सीता से मिले वरदानों का धार्मिक महत्व। ...और पढ़ें
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Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जी की 8 सिद्धियां (Image Source: AI-Generated)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हम अक्सर हनुमान चालीसा में एक पंक्ति पढ़ते हैं- 'अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता'। इसका मतलब है कि माता सीता ने हनुमान जी को वो आठ सिद्धियां और नौ निधियां दी हैं, जिनकी मदद से वे असंभव को भी संभव बना देते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि ये 8 सिद्धियां आखिर हैं क्या और ये कैसे काम करती हैं?
आज हनुमान जन्मोत्सव के पावन मौके पर, चलिए जानते हैं बजरंगबली की उन महाशक्तियों के बारे में, जिन्होंने उन्हें 'महाबली' बनाया।
ये हैं हनुमान जी की 8 दिव्य सिद्धियां
- अणिमा: इस सिद्धि की मदद से हनुमान जी अपने शरीर को एक 'अणु' (Atom) जितना छोटा बना सकते हैं। याद करिए जब वे लंका में घुसे थे, तो उन्होंने इसी शक्ति का इस्तेमाल कर मच्छर जैसा रूप धर लिया था।
- महिमा: यह अणिमा का ठीक उल्टा है। इसमें हनुमान जी अपने शरीर को पहाड़ जैसा विशाल बना सकते हैं। रामायण कथा के अनुसार, हनुमान जी ने लंका पार करते समय और लंका पहुंचने पर वानर सेना की ताकत को दिखाने के लिए इस सिद्धि का प्रयोग किया था।
- गरिमा: इस शक्ति से हनुमान जी अपना वजन इतना भारी कर सकते हैं कि दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें हिला तक न सके। महाभारत में भीम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमान जी ने अपनी पूंछ इसी शक्ति से भारी कर दी थी।
- लघिमा: इस सिद्धि से हनुमान जी अपने शरीर को रुई या पंख जैसा हल्का बना लेते हैं। इसी वजह से वे मीलों दूर तक बिना थके उड़ सकते हैं और पानी पर भी चल सकते हैं।
- प्राप्ति: इस शक्ति का मतलब है किसी भी चीज को प्राप्त कर लेना। इससे वे पशु-पक्षियों की भाषा समझ सकते हैं और भविष्य में होने वाली घटनाओं को देख सकते हैं।
- प्राकाम्य: यह इच्छाशक्ति से जुड़ी है। इसकी मदद से हनुमान जी पाताल लोक तक जा सकते हैं, आकाश में उड़ सकते हैं और लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकते हैं।
- ईशित्व: यह सातवीं शक्ति नेतृत्व की शक्ति है। इसका अर्थ है 'ईश्वरत्व'। इस सिद्धि के कारण ही पूरी वानर सेना ने उनका नेतृत्व स्वीकार किया और वे दैवीय शक्तियों के स्वामी कहलाए।
- वशित्व: इस शक्ति से हनुमान जी किसी को भी अपने वश में कर सकते हैं, लेकिन हनुमान जी ने इसका प्रयोग केवल धर्म की रक्षा और दुष्टों के दमन के लिए किया है।
हनुमान जी की इन सिद्धियों का सबसे बड़ा और प्रामाणिक स्रोत 'रामचरितमानस' का सुंदरकांड है। इसमें गोस्वामी तुलसीदास जी ने माता सीता द्वारा उन्हें दिए गए वरदान का वर्णन किया है। इसके अलावा, प्राचीन 'मार्कंडेय पुराण' और महर्षि पतंजलि के 'योग सूत्र' में भी इन आठ सिद्धियों (अष्ट सिद्धियों) का विस्तार से उल्लेख मिलता है, जो कठिन योग और भक्ति से प्राप्त होती हैं।
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