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    Holika Dahan 2026: आखिर कौन है 'भद्रा'? जिसके साये में शुभ काम करना माना जाता है वर्जित

    Updated: Sat, 28 Feb 2026 12:12 PM (GMT+05:30)

    3 मार्च 2026 को होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जानिए कौन है शनि देव की बहन 'भद्रा' और क्यों इनके समय में होलिका दहन करन ...और पढ़ें

    भद्रा काल के नियम (Image Source: AI-Generated)

    भद्रा काल के नियम (Image Source: AI-Generated)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले मुहूर्त और भद्रा का विचार अवश्य किया जाता है, होलिका दहन के समय भद्रा का होना बहुत ही संवेदनशील माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भद्रा काल को विघ्नकारी माना गया है, जिसमें किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्यों के सफल न होने की आशंका बनी रहती है।

    शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि भद्रा मुख में होलिका दहन करने से न केवल पूजा का फल कम हो जाता है, बल्कि यह समाज और व्यक्ति के लिए कष्टकारी भी हो सकता है। यही कारण है कि इस साल 3 मार्च 2026 को भी विद्वान भद्रा के समाप्त होने और शुभ मुहूर्त के आने का इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं ताकि पर्व की पवित्रता और लाभ बना रहे।

    कौन है भद्रा? पौराणिक कथा

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, भद्रा सूर्य देव की पुत्री और न्याय के देवता शनि देव की सगी बहन है। माना जाता है कि जब भद्रा का जन्म हुआ, तो वह स्वभाव से बहुत ही उग्र और विनाशकारी थी। वह जन्म लेते ही पूरे संसार को निगलने और यज्ञ-अनुष्ठानों में बाधा डालने लगी। उनके स्वभाव के कारण ऋषि-मुनि और देवता भी भयभीत रहने लगे।

    holika niyam

    (Image Source: AI-Generated)

    भद्रा के इस विनाशकारी व्यवहार को देखते हुए ब्रह्मा जी ने उसे समझाया और उन्हें पंचांग के एक विशेष समय (विष्टि करण) में स्थान दिया। ब्रह्मा जी ने कहा कि जो व्यक्ति भद्रा के समय में कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य करेगा, उसे सफलता नहीं मिलेगी। तभी से शुभ कार्यों में भद्रा का त्याग किया जाने लगा।

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    होलिका दहन और भद्रा का संबंध

    होलिका दहन के संदर्भ में भद्रा का त्याग करना अनिवार्य माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, 'भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा', अर्थात भद्रा काल में दो कार्य कभी नहीं करने चाहिए श्रावणी (रक्षाबंधन) और फाल्गुनी (होलिका दहन)। मान्यता है कि यदि भद्रा में होलिका दहन किया जाए, तो उस स्थान पर नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है और जन-धन की हानि भी हो सकती है।

    भद्रा के समय अग्नि जलाना अशुभ फल देने वाला माना जाता है। इसलिए, भक्त हमेशा भद्रा के पुंछा भाग या भद्रा की समाप्ति का इंतजार करते हैं ताकि सभी मांगलिक कार्य सुचारु रूप से हो सकें।

    ग्रहों का प्रभाव और सावधानी

    ज्योतिषीय दृष्टि से भद्रा काल में मानसिक एकाग्रता में कमी आने की आशंका होती है। इस समय ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी होती है जो व्यक्ति के भीतर क्रोध और भ्रम पैदा कर सकती है। इस वर्ष 3 मार्च को भद्रा के साथ-साथ चंद्र ग्रहण का भी साया है, जो इस समय को और भी अधिक महत्वपूर्ण बना देता है।

    ग्रहण के सूतक और भद्रा के दोष से बचने के लिए शुभ मुहूर्त में ही पूजा करना श्रेष्ठ है। होलिका पूजन के दौरान शांत मन से मंत्रों का जाप करना और अग्नि देव से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करना चाहिए। सही समय पर किया गया पूजन ही आपके जीवन के सभी कष्टों को भस्म करने की शक्ति रखता है।

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    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।