Holika Dahan 2026: भद्रा मुख में दहन से क्यों बढ़ती है अशांति? जानें शास्त्रों का रहस्य
भद्रा मुख में अग्नि जलाना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें 3 मार्च 2026 को होलिका दहन का सटीक शुभ मुहूर्त, भद्रा पूंछ और मुख का समय, और शास्त्रों के अनु ...और पढ़ें

होलिका दहन 2026 (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले सही मुहूर्त और समय का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस साल 3 मार्च 2026 को मनाए जाने वाले होलिका दहन जैसे महापर्व के लिए भद्रा काल का विचार करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भद्रा को भगवान सूर्य की पुत्री और शनिदेव की बहन माना गया है, जिनका स्वभाव अत्यंत कठोर और उग्र है। ऐसी मान्यता है कि भद्रा के समय किया गया कोई भी मांगलिक कार्य सफल नहीं होता। विशेष रूप से भद्रा मुख के दौरान होलिका दहन करने से परिवार और समाज में अशांति फैलने की आशंका बनी रहती है। यही कारण है कि इस साल भी विद्वान भद्रा के समय को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त
होलिका दहन मुहूर्त शाम 06:22 बजे से रात 08:50 बजे तक
कुल अवधि 02 घंटे 28 मिनट
भद्रा पूंछरात 01:25 बजे से 02:35 बजे तक (4 मार्च)
भद्रा मुखरात 02:35 बजे से तड़के 04:30 बजे तक (4 मार्च)
भद्रा मुख और पूंछ के बीच का धार्मिक अंतर
भद्रा के प्रभाव को समझने के लिए इसके विभिन्न अंगों के महत्व को जानना बहुत जरूरी है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि 'भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा', अर्थात भद्रा काल में रक्षाबंधन और होलिका दहन का कार्य कभी नहीं करना चाहिए। भद्रा के मुख को सबसे अधिक विनाशकारी माना गया है, जहां अग्नि जलाने से धन हानि और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के आने की आशंका रहती है।

(Image Source: AI-Generated)
इसके विपरीत, भद्रा पूंछ को कुछ विशेष परिस्थितियों में शुभ कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है। भद्रा मुख में किया गया कोई भी पूजन जीवन के सहज संचालन में बड़ी बाधाएं खड़ी कर सकता है, इसलिए इस काल का त्याग करना ही उचित माना जाता है।
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शास्त्रों के अनुसार भद्रा मुख में दहन के परिणाम
पौराणिक कथाओं और ज्योतिषीय ग्रंथों में भद्रा मुख में होलिका दहन के दुष्परिणामों का विस्तार से वर्णन मिलता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति भद्रा मुख के दौरान अग्नि जलाता है, उनके घर और कार्यक्षेत्र में नकारात्मक ऊर्जा का वास होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे न केवल व्यक्तिगत जीवन प्रभावित होता है, बल्कि व्यापार और व्यवसाय में भी नुकसान की स्थिति बन सकती है।
धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस अशुभ समय में किया गया दहन समाज में बीमारी और कलह की संभावना को जन्म देता है। इसलिए, यदि हम अपने जीवन में खुशियों और प्रगति की आशा रखते हैं, तो हमें भद्रा मुख के समय को पूरी तरह से त्यागकर शुभ मुहूर्त की प्रतीक्षा करनी चाहिए।
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लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।