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    एक मुट्ठी काले तिल से दूर करें राहु-शनि की बाधा, जानें कैसे वरदान है होलिका की परिक्रमा

    Updated: Thu, 26 Feb 2026 03:00 PM (GMT+05:30)

    क्या आप शनि की साढ़ेसाती या राहु से परेशान हैं? जानें होलिका दहन की रात एक मुट्ठी काले तिल और परिक्रमा का वो गुप्त उपाय जो आपकी किस्मत बदल सकता है। ...और पढ़ें

    शनि की साढ़ेसाती से कैसे पाएं मुक्ति? (Image Source: AI-Generated)

    शनि की साढ़ेसाती से कैसे पाएं मुक्ति? (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। होलिका दहन (Holika Dahan 2026) की रात को केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व नहीं, बल्कि ज्योतिष शास्त्र में 'सिद्धि की रात' माना गया है। अगर आप लंबे समय से राहु-केतु (Rahu-Ketu) या शनि की साढ़ेसाती से परेशान हैं, तो एक मुट्ठी काले तिल और होलिका की परिक्रमा आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

    ज्योतिष शास्त्र में काले तिल का संबंध सीधे शनि देव (Shani Dev) और राहु से माना गया है। तिल में नकारात्मक ऊर्जा को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। जब हम एक मुट्ठी काले तिल अपने सिर से सात बार वार कर होलिका की अग्नि में डालते हैं, तो यह हमारे ऊपर मंडरा रहे दुर्भाग्य और मानसिक तनाव (Mental Stress) को अग्नि के हवाले कर देता है।

    होलिका की परिक्रमा

    होलिका दहन के समय अग्नि की परिक्रमा करना केवल एक रिवाज नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा विज्ञान छिपा है। मान्यताओं के अनुसार, जलती हुई होलिका से निकलने वाली ऊर्जा बहुत शक्तिशाली होती है। जब हम 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' (Mahamrityunjay Mantra) का जप करते हुए परिक्रमा करते हैं, तो हमारे शरीर के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बन जाता है।

    Holika upay

    (Image Source: AI-Generated)

    शास्त्रों के अनुसार, अग्नि के चारों ओर घूमने से शरीर के भीतर के चक्र सक्रिय होते हैं और राहु का भ्रम दूर होता है।

    कैसे करें यह उपाय?

    संकल्प: दहन से पहले अपने हाथ में एक मुट्ठी काले तिल लें और अपनी परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करें।

    उतारा: तिलों को अपने सिर के ऊपर से घड़ी की दिशा में (Clockwise) सात बार घुमाएं।

    अर्पण: इन तिलों को होलिका की पवित्र अग्नि में अर्पित कर दें।

    परिक्रमा: इसके बाद कम से कम 3, 5 या 7 बार परिक्रमा करें और जलती हुई अग्नि को प्रणाम करें।

    पुराणों में वर्णित कथाओं के आधार पर, जिस तरह प्रह्लाद को अग्नि छू तक नहीं पाई थी, उसी तरह यह परिक्रमा भक्त को दुनिया की बुरी नजर और ग्रहों के क्रूर प्रभाव से बचाती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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