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    Holika Dahan 2026: वरदान बना अभिशाप, आखिर क्यों जल गई होलिका?

    Updated: Thu, 26 Feb 2026 12:30 PM (IST)

    होलिका दहन (Holika Dahan 2026) फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। ...और पढ़ें

    Holika Dahan 2026: होलिका दहन की कथा। (Ai Generated Image)

    Holika Dahan 2026: होलिका दहन की कथा। (Ai Generated Image) 

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    धर्म डेक्स, नई दिल्ली। Holika Dahan 2026: फाल्गुन पूर्णिमा की वह रात जब बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होलिका दहन किया जाता है, हमारे मन में एक ही सवाल उठता है, जिस होलिका के पास ब्रह्मा जी का दिव्य वरदान था, वह जल कैसे गई? 2026 में जब हम फिर से होलिका की अग्नि प्रज्वलित करेंगे, तो यह सवाल हमारे दिमाग में फिर से आएगा, तो आइए इस आर्टिकल में होलिका दहन की पौराणिक कथा के बारे में जानते हैं।

    holika dahan katha

    Ai Generated Image

    वरदान का रहस्य

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को ब्रह्मा जी से एक ऐसा सुरक्षा कवच मिला था, जिसे ओढ़ने के बाद अग्नि उसे छू भी नहीं सकती थी, लेकिन इस वरदान के साथ एक शर्त भी थी कि यह शक्ति केवल तभी तक असर करेगी, जब तक इसका उपयोग रक्षा के लिए किया जाएगा। लेकिन होलिका ने इसका उपयोग अपने भतीजे श्री हरि भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को मारने के लिए किया, जिससे उस वरदान की मर्यादा टूट गई। जैसे ही इरादा रक्षा से बदलकर हत्या हुआ, वरदान का शुभ प्रभाव समाप्त हो गया।

    भगवान का न्याय

    होलिका दहन की कहानी में हवा का बहुत महत्व है। कहते हैं कि जैसे ही चिता में अग्नि प्रज्वलित हुई, भगवान विष्णु की माया से ऐसी तेज हवा चली कि वह सुरक्षा कवच होलिका के शरीर से उड़कर नन्हें भक्त प्रहलाद पर जा लिपटा। प्रहलाद अपनी भक्ति और सत्य के मार्ग पर थे, इसलिए प्रकृति और परमात्मा दोनों ने उनका साथ दिया।

    • शक्ति का दुरुपयोग - चाहे वह दैवीय शक्ति हो या कुछ और, अगर इसका उपयोग किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाएगा, तो वह शक्ति अपने आप ही खत्म हो जाएगी।
    • अधर्म पर धर्म की विजय - होलिका का जलना यह दिखाता है कि बुराई कितनी भी क्यों न दिखे, सत्य की एक छोटी सी लौ उसे राख करने की क्षमता रखती है।
    • साफ नियत - प्रहलाद के पास कोई वरदान नहीं था, सिर्फ विश्वास था। वहीं, होलिका के पास रक्षा कवच था पर नियत साफ नहीं थी। अंत में विश्वास की जीत हुई।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।