जैन धर्म की पूजा पद्धति हिंदू मंदिरों से कैसे अलग है, क्या हैं अनोखी परंपराएं?
जैन धर्म में पूजा का उद्देश्य आध्यात्मिक मुक्ति और तीर्थंकरों का सम्मान है, जबकि हिंदू धर्म में मूर्ति पूजा और देवताओं का आह्वान प्रमुख है। दोनों धर्म ...और पढ़ें

जैन और हिंदू पूजा पद्धतियों में मुख्य अंतर जानें (Picture Credit: AI Generated)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सभी धर्मों की पूजा-पाठ को लेकर अलग विचार धरा होती है। जहां कुछ धर्म के लोग ईश्वर की मूर्ति पूजा पर जोर देते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो निराकार भगवान को पूजते हैं।
ऐसे ही जब बात हिंदू और जैन मंदिरों की आती है तब उनकी भी पूजा का तरीका एक-दूसरे से अलग होता है। यूं कहा जाए कि जैन पूजा का उद्देश्य कई दूसरे धर्मों की पूजा से अलग होता है।
जहां जैन धर्म में मुख्य रूप से दो विचार धाराओं के लोग होते हैं पहले वो जो सफेद वस्त्र धारण करते हैं, इन्हें श्वेताम्बर कहा जाता है और दूसरे वो जो कि आसमान को ही अपने वस्त्र मानते हैं, जिन्हें दिगंबर कहा जाता है।
जैन धर्म की पूजा का मकसद केवल देवताओं से आशीर्वाद लेना नहीं होता है बल्कि आचरणों को भी ठीक बनाए रखना होता है। आइए आपको बताते हैं जैन और हिंदू धर्म की पूजा पद्धति के मुख्य अंतर के बारे में।
जैन धर्म में कैसे होती है पूजा?
जैन धर्म में पूजा का मकसद देवताओं से भौतिक वरदान मांगना नहीं होता है बल्कि सही आचरण, व्रतों और आध्यात्मिक मुक्ति या मोक्ष के परम लक्ष्य को याद करना भी होता है।
इस धर्म में तीर्थकर की पूजा की जाती है जिसका मतलब होता है सम्मानित आध्यात्मिक गुरु जैसे ऋषभनाथ, महावीर और अन्य गुरु। जैन धर्म में अरिहंत और सिद्ध यानी मुक्त आत्माएं का पवित्र आदर्शों के रूप में सम्मान किया जाता है। कुछ अनुष्ठानों में समुदाय के गुरुओं और साथ साधना करने वालों का सम्मान भी किया जा सकता है, लेकिन इनकी पूजा का जोर आध्यात्मिक आदर्शों पर ही निहित रहता है, न कि देवताओं की पूजा पर।
जैन धर्म की पूजा सामग्री के रूप में आमतौर पर साधारण, प्रतीकात्मक चीजों जैसे दीपक, फूल, अगरबत्ती, पानी का इस्तेमाल होता है और इसमें दिखावटी रीति-रिवाजों के बजाय साफ-सुथरे और अनुशासित व्यवहार पर जोर दिया जाता है। जैन धर्म के प्रमुख ग्रंथ आचारांग सूत्र में पूजा का बहुत ही साधारण तरीका बताया गया है और ये मूर्ति पूजा पर ज्यादा जोर नहीं देते हैं और इसमें जैन भिक्षुओं द्वारा पालन किए जाने वाले नियमों का उल्लेख भी है।
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हिंदू मंदिरों में कैसे होती है पूजा?
हिंदू मंदिरों में नियमित रूप से प्रत्येक दिन प्रातः पूजा, संध्या काल की पूजा और और शयन पूजा का विधान है। यहां हिंदू पुजारी पवित्र ज्योति जिसे आरती भी कहा जाता है उसके माध्यम से देवताओं का आह्वान करके, घंटी बजाकर और शंखनाद के साथ आरती करते हैं।
हिंदू धर्म मुख्य रूप से मूर्ति पूजा पर जोर दिया जाता है और मंदिर में एक पुजारी की उपस्थिति में पूजा नियमित रूप से विधि-विधान के साथ की जाती है।
उपहार के रूप में देवताओं को उनकी पसंद की चीजें जैसे सिंदूर, मोदक, पान आदि चढ़ाया जाता है। इसमें हर एक देवता का स्वरूप होता है और उनकी पूजा का अलग तरीका होता है जो भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
मुख्य रूप से जैन और हिंदू मंदिरों में पूजा का स्वरूप एक दूसरे से थोड़ा अलग है। जहां एक तरफ हिंदू मंदिरों में देवताओं की पूजा होती ही वहीं दूसरी ओर जैन मंदिरों में गुरों को ही पूजनीय मानकर उनके नियमों का अनुसरण किया जाता है।
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