Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    हिंदू धर्म में दीपक जलाना क्यों माना जाता है शुभ? ऋग्वेद के इस मंत्र में छिपा है इसका गहरा अर्थ

    Updated: Wed, 10 Jun 2026 08:01 AM (IST)

    हिंदू धर्म में दीपक जलाने की परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। ऋग्वेद के मंत्रों में अग्नि और दीपक के महत्व का उल्लेख मिलता है। ...और पढ़ें

    सनातन परंपरा में दीपक जलाने के कारण (AI-Generated Image)

    सनातन परंपरा में दीपक जलाने के कारण (AI-Generated Image)

    HighLights

    1. दीपक अग्नि तत्व का प्रतीक माना जाता है

    2. ऋग्वेद में अग्नि को अमृत और मार्गदर्शक बताया गया है

    3. दीपक ज्ञान, चेतना और सकारात्मकता का प्रतीक है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में दीपक का विशेष महत्व माना गया है। घर की पूजा हो, मंदिर की आरती हो या कोई शुभ कार्य, दीपक जलाए बिना अनुष्ठान अधूरा माना जाता है। यही कारण है कि सदियों से भारतीय संस्कृति में दीप प्रज्वलन की परंपरा चली आ रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दीपक जलाने को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है?

    ऋग्वेद के एक मंत्र में अग्नि की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है-

    अयं कविरकविषु प्रचेता मर्त्येष्वाग्निरमृतो नि धायि।
    स मा नो अत्र जुहुरः सहस्वः सदा त्वे सुमनसः स्याम॥

    इस मंत्र का मतलब है कि अग्नि सामान्य मनुष्यों के बीच अमृत की तरह निवास करती है। वह ज्ञान देने वाली, मार्ग दिखाने वाली और जीवन में चेतना का संचार करने वाली शक्ति है। वैदिक काल से ही अग्नि को देवताओं और मनुष्यों के बीच सेतु माना गया है।

    दीपक में जलने वाली लौ उसी अग्नि तत्व का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि जब हम दीपक जलाते हैं तो केवल एक लौ नहीं जलाते, बल्कि अपने जीवन में ज्ञान, आशा और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करते हैं। दीपक का उजाला अंधकार को दूर करता है, ठीक उसी तरह जैसे ज्ञान अज्ञानता को समाप्त करता है।

    दीपक से आती है सकारात्मक ऊर्जा

    हिंदू धर्म में यह भी माना जाता है कि जहां नियमित रूप से दीपक जलता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए सुबह और शाम घर के मंदिर में दीपक जलाने की परंपरा है। कई लोग इसे ईश्वर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम भी मानते हैं।

    खबरें और भी

    Deepak significance

    (AI-Generated Image)

    इस मंत्र से भी आप दीया जलाने के महत्व को समझ सकते हैं।

    असतो मां सद्-गमय (हमें असत्य से सत्य की ओर ले चलो)
    तमसो माँ ज्योतिर्-गमय (अंधकार से प्रकाश की ओर)
    मृत्योर्-मां-मृतं गमय (मृत्यु से अमरता की ओर)

    दीपक का एक संदेश यह भी है कि मनुष्य को स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देना चाहिए। जिस प्रकार दीपक अपनी लौ से आसपास के अंधकार को दूर करता है, उसी प्रकार व्यक्ति को अपने ज्ञान, अच्छे कर्म और सकारात्मक सोच से समाज में प्रकाश फैलाना चाहिए।

    यही कारण है कि सनातन परंपरा में दीपक केवल पूजा की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन दर्शन का प्रतीक माना गया है। यह हमें याद दिलाता है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटी-सी लौ भी उसे दूर करने की क्षमता रखती है।

    यह भी पढ़ें- क्या हिंदू धर्म में महिलाएं भी बन सकती हैं पुजारी? ज्योतिषाचार्य ने बताए असली नियम

    यह भी पढ़ें- गर्भाधान से अंतिम संस्कार तक... कौन-से हैं हिंदू धर्म के 16 संस्कार? 90% लोग नहीं जानते इनका महत्व

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।