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मंदिरों के गर्भगृह में हर किसी को क्यों नहीं मिलता प्रवेश? क्या है इसके पीछे का गहरा रहस्य

Updated: Sat, 15 Aug 2026 04:22 PM (IST)

भारत में मंदिरों के गर्भगृह को अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है, जहां देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित होती हैं। इसकी पवित्रता और नियमों के कारण आमतौर पर केवल पंडितों को ही इसमें प्रवेश की अनुमति होती है, जबकि श्रद्धालु बाहर से दर्शन करते हैं।

गर्भगृह में हर किसी को क्यों प्रवेश नहीं देता?

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत जिसे 'मंदिरों को देश' भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में छोटे-बड़े लाखों ऐसे मंदिर हैं, जहां रोजान पूजा-पाठ होने के साथ श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन इन सभी छोटे-बड़े मंदिरों में एक चीज कॉमन होती है, वो है 'मंदिर का गर्भगृह' जिसे सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है।

भारत के कई मंदिरों में श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश करनी की अनुमति तो होती है, लेकिन बात जब मंदिर के गर्भगृह की आती है, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया जाता है। आखिर क्यों मंदिर के गर्भगृह में हर किसी को जाने की अनुमति नहीं मिलती? आइए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक कारण।

गर्भगृह क्या होता है?

जब भी हम किसी भी मंदिर में जाते हैं, तो वहां एक ऐसा खास स्थान जरूर होता है, जहां देवी-देवता की मूर्ति स्थापित होती है, क्योंकि यह भगवान का निवास स्थान माना जाता है, और इसे ही गर्भगृह कहा जाता है। गर्भगृह का आकार- प्रकार और मूर्ति रखने की जगह पहले से ही निर्धारित होती है और इसका निर्माण शास्त्रों को ध्यान में रखकर किया जाता है।

गर्भगृह दिखने में बिल्कुल आयातकार होता है जिसके तीन और दीवारें और छोटा सा मुख्य द्वार होता है। आमतौर पर गर्भगृह एक खिड़की और कम रोशनी वाली कमरा होता है। इसे ऐसा इसलिए बनाया जाता है ताकि भक्त अपना ध्यान पूरी तरह ईश्वर में लगा सकें और उनका ध्यान नहीं भटकें।

भारत में छोटे-बड़े मंदिरों की कुल संख्या लाखों में है, जिसमें कई मंदिर हजारों साल पुराने हैं। देशभर में कई ऐसे मंदिर हैं जहां प्रतिदिन रोजाना लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इसमें माता वैष्णो देवी, तिरुपति बालाजी, महाकालेश्वर मंदिर, खाटू श्याम मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, काशी विश्वनाथ और अयोध्या में बना नवनिर्मित राममंदिर भी शामिल है।

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मंदिर का गर्भगृह क्यों हैं खास?

प्रत्येक मंदिर में एक ऐसा स्थान जरूर होता है, जो बेहद खास और पवित्र माना जाता है, उसे ही गर्भगृह कहते हैं। किसी भी मंदिर का हृदय स्थान गर्भगृह को माना जाता है। इस स्थान पर देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित होती है।

ऐसे में इस स्थान पर सभी को प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती है। ऐसा करने के पीछे उस स्थान की स्वच्छता, पवित्रता और मंदिर से जुड़े नियमों का पालन करना होता है। गर्भगृह में सिर्फ पंडित पुरोहितों को ही पूजा करने की अनुमति होती है। हालांकि श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह के बाहर परिक्रमा स्थान बना होता है, जहां वे गर्भगृह की परिक्रमा लगाते हैं।

हालांकि भारत के अधिकतर मंदिरों में गर्भगृह में प्रवेश करने की अनुमति हर किसी के पास होती है। मंदिर में यह स्थान सबसे ज्यादा ऊर्जावान और पवित्र माना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।