दुल्हन को अपनी बारात क्यों नहीं देखनी चाहिए? शास्त्रों और पुरानी मान्यताओं में छुपा है यह बड़ा कारण
हिंदू धर्म में विवाह से पूर्व दुल्हन द्वारा अपनी बारात न देखने की परंपरा, उसे नजरदोष से बचाने का उद्देश्य होती है। ...और पढ़ें

दुल्हन को नजरदोष से बचाने के लिए नहीं देखने दी जाती है उसे बारात (Picture Credit- magnific)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में विवाह को केवल दो लोगों का साथ नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार माना गया है। हिंदू धर्म में विवाह सोलह संस्कारों में से एक है, जिसका उद्देश्य पति-पत्नी को धर्म, परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाना है। इसी कारण विवाह से जुड़ी कई परंपराएं आज भी निभाई जाती हैं। इन्हीं में एक मान्यता यह भी है कि दुल्हन को विवाह से पहले अपनी बारात नहीं देखनी चाहिए।
क्या कहते हैं शास्त्र?
धार्मिक मान्यता के अनुसार विवाह का प्रत्येक अनुष्ठान शुभ मुहूर्त में संपन्न किया जाता है। दूल्हे की बारात को मंगल ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए दुल्हन को मंडप में शुभ समय पर ही लाया जाता है, ताकि वर-वधू पहली बार एक दूसरे को दुल्हा-दुल्हन के रूप में देखें, तो वह धार्मिक विधि के अनुसार हो। इसी वहज से कई परिवारों में दुल्हन को पहले से बारात देखने से रोका जाता है।
शिव पुराण में क्या मिलता है?
शिव पुराण में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार विवाह की सभी रस्में विधि-विधान और शुभ मुहूर्त के अनुसार संपन्न हुईं थी। इस वजह से भी हिंदू धर्म में विवाह में धार्मिक नियमों और शुभ समय को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि इस कथा में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि माता पार्वती ने बारात नहीं देखी थी, बल्कि इसके विपरीत यह बात लिखी है कि माता पार्वती जब बारात देखी तो वह बारातियों को देखकर बेहोश हो गई थीं। यह भी एक कारण हो सकता है कि, दुल्हन को बारात देखने से रोका जाता है क्योंकि मान्यता है कि दुल्हन को बारातियों की नजर लग जाती है।
(Picture Credit- magnific)
लोक मान्यताओं में क्या माना जाता है?
लोक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि विवाह से पहले दूल्हा और दुल्हन एक-दूसरे को कम से कम देखें, ताकि विवाह का दिन विशेष और यादगार बना रहे। हिंदू धर्म में विवाह बड़े सामाजिक आयोजनों के रूप में होते हैं, ऐसे में परिवार दुल्हन को भीड़-भाड़ और अनावश्यक तनाव से दूर रखते हैं। वैदिक ज्योतिष में राहु विवाह के समय सबसे प्रबल छाया ग्रह माना जाता है। यह विवाह में अचानक बदलाव की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
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आज के समय में इस परंपरा का महत्व
आज के समय में कई विवाह से पहले भी दुल्हन बालकनी, खिड़की या मंच से बारात देख लेती है। हालांकि, कोशिश यही रहती हैं दुल्हन को कोई तब तक न देख पाए जब तक वह जयमाला के लिए न जाए। परंपरा के अनुसार इस रीति का पालन होता है, तो इसे अशुभ नहीं माना जा सकता।
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