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शादी में दूल्हे के जूते चुराने की वजह सिर्फ हंसी-मजाक या है कोई बड़ी वजह? जानिए इस मजेदार परंपरा का असली महत्व

Published: Tue, 23 Jun 2026 03:00 PM (IST)

हिंदू विवाह में जूता चुराई की रस्म केवल हंसी-मजाक नहीं, बल्कि दो परिवारों के रिश्ते मजबूत करने का माध्यम है। ...और पढ़ें

क्या है जूता चुराई रस्म का असली कारण (Picture Credit- AI Generated)

क्या है जूता चुराई रस्म का असली कारण (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में विवाह को दो आत्माओं का पवित्र बंधन माना गया है। विवाह हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में शामिल है। विवाह के दौरान कई परंपराओं और रीति-रिवाजों को निभाया जाता है। शादी में निभाई जाने हर एक रस्म का विशेष महत्व है। विवाह की एक ऐसे रस्म है, जब मंडप में बेहद हंसी-मजाक देखने को मिलता है। जूता चुराई की रस्म बेहद खास है।

जब दूल्हा मंडप में बैठने से पहले जूते उतारता है, तो सालियां उन्हें चुराकर छिपा देती हैं। इसके बाद सालियां जूते देने के लिए शगुन की मांग करती है। इस दौरान मंडप में बेहद हंसी-मजाक होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों निभाई जाती है जूता चुराई की रस्म। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस लेख में आपको एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार बताते हैं क्या है इस खास रस्म की वजह।

क्यों होती है शादियों में जूता चुराई की रस्म?

ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा बताते हैं कि हिंदू विवाह केवल दो आत्माओं का नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन है। जूता चुराई की रस्म आपसी रिश्ते को मजबूत और मधुर बनाने के लिए सदियों से चली आ रही है। जब दूल्हा मंडप में बैठता है, तो दुल्हन की बहनें चुपके से उसके जूते छिपा देती हैं।

इस रस्म का मुख्य उद्देश्य विवाह के गंभीर माहौल में हंसी-मजाक, उमंग और आनंद का रंग घोलना है। यह जीजा और साले-सालियों के बीच एक अनौपचारिक और दोस्ताना रिश्ते की शुरुआत करता है। नेग (शगुन) के लेन-देन से दोनों पक्षों में अपनापन बढ़ता है और शादी के पल हमेशा के लिए यादगार बन जाते हैं। यह मात्र एक रस्म नहीं, बल्कि नए रिश्तों में मजबूती लाने का तथा लड़के को अपने नए रिश्ते समझने में भी सहायक माध्यम है।

Shoe Stealing Ritual (1)

 

जीजा-साली के रिश्ते की मिठास- जूता चुराई की रस्म के दौरान जीजा-साली में खूब हंसी मजाक होता है। दूल्हे की सालियां मनचाहा शगुन की मांग करती हैं। कई बार दूल्हे पक्ष की तरफ से मनचाहा शगुन दे दिया जाता है, लेकिन कुछ लोग मनचाहा शगुन को कम करने की मांग करते हैं। इस दौरान जीजा-साली के बीच खूब हंसी मजाक होता है। जूता चुराई की यह खास रस्म रिश्ते को स्थापित करने और मजबूत बनाने का एक जरिया माना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

 

 

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