विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

शादी में दूल्हे को घोड़ी पर ही क्यों बैठाया जाता है? जानिए इस रस्म से जुड़ा गहरा रहस्य

Published: Mon, 22 Jun 2026 08:00 PM (GMT+05:30)

विवाह में दूल्हे का घोड़ी पर बैठना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण ...और पढ़ें

शादी में घोड़ी की परंपरा का क्या है सच? (Picture Credit- AI Generated)

शादी में घोड़ी की परंपरा का क्या है सच? (Picture Credit- AI Generated) 

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। विवाह को हिंदू धर्म में 16 संस्कारों में से एक माना जाता है। विवाह दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र बंधन माना गया है। विवाह के दौरान कई तरह की रस्में की जाती हैं। हर रस्म का अपना एक विशेष महत्व होता है।
एक रस्म ऐसी है, जब घर से बारात निकलती है, तो दूल्हे को घोड़ी पर बैठाया जाता है। अक्सर लोगों में मन में सवाल आता होगा कि आखिर दूल्हे को घोड़ी पर ही बैठाकर बारात क्यों निकली जाती है, तो ऐसे में आइए इस लेख में एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार आपको बताते हैं कि इस रस्म के पीछे की खास वजह के बारे में।

ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, हिंदू धर्म में विवाह के समय दूल्हे का घोड़ी पर बैठना बेहद खास माना जाता है। इसके पीछे गहरे धार्मिक,सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण छिपे हैं:

इंद्रियों पर नियंत्रण का पाठ: घोड़ी को अत्यधिक चंचल, फुर्तीली और बुद्धिमान माना जाता है। जिस तरह एक कुशल सवार अपनी सूझबूझ और नियंत्रण से चंचल घोड़ी को अपने वश में रखता है, ठीक उसी तरह दूल्हे को भी संदेश दिया जाता है कि उसे अपने नए गृहस्थ जीवन में अपनी चंचल इंद्रियों, इच्छाओं और हर परिस्थिति को नियंत्रण में रखना होगा।

यह भी पढ़ें- 'परिछन चलली सासू सुहागिन…' सिर्फ एक रस्म नहीं, जानें शादियों में द्वार-पूजन और परिछन गीतों का महत्व

उत्पत्ति और नए जीवन का प्रतीक: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव की पत्नी 'संज्ञा' ने घोड़ी का रूप धारण किया था, जिससे अश्विनी कुमारों का जन्म हुआ। इस नाते सनातन परंपरा में घोड़ी को उत्पत्ति, वंश वृद्धि और एक नए जीवन की शुभ शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है।

_wedding ritual (2)

(Picture Credit- AI Generated) 

शौर्य और वीरता का भाव: इतिहास में योद्धा और राजा-महाराजा युद्ध व विजय अभियानों के लिए घोड़ों का इस्तेमाल करते थे। विवाह के समय दूल्हे का घोड़ी पर सवार होना उसके शौर्य, वीरता और जिम्मेदारी उठाने के साहस को दर्शाता है।

वैसे देखा जाए तो विवाह के दौरान की जाने वाली ये खास परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। प्राचीन समय में क्षत्रियों और राजा-महाराजाओं से यह रस्म शुरू हुई थी। शादी के दिन दूल्हे को भी एक राजा के बराबर माना जाता है, जो अपनी दुल्हन को ब्याह कर अपने घर ले जाने के लिए निकलता है। आज के समय भी यह विवाह के दौरान निभाई जाती है। 

यह भी पढ़ें- दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाने के बाद घर में क्यों कर दिया जाता है 'कैद'? वजह है बेहद खास

यह भी पढ़ें- हिंदू विवाह में दूल्हा दुल्हन की मांग में 3 बार सिंदूर क्यों भरता है, जानें धार्मिक कारण?

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।