दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाने के बाद घर में क्यों कर दिया जाता है 'कैद'? वजह है बेहद खास
हिंदू धर्म में शादी से पहले निभाई जाने वाली हल्दी की रस्म के बाद दूल्हा-दुल्हन को घर से बाहर क्यों नहीं जाने दिया जाता है, इसके पीछे धार्मिक, वैज्ञानि ...और पढ़ें

हल्दी के बाद दूल्हा-दुल्हन को घर से बाहर क्यों नहीं जाने देते? (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शादी से पहले कई तरह की रस्मों को निभाया जाता है। इसमें हल्दी से जुड़ी रस्म सबसे प्रमुख मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, हल्दी लगाने के बाद दंपत्ति को घर से बाहर क्यों नहीं जाने दिया जाता है?
आज भी कई घरों की शादियों में इस रस्म को पारंपरिक और श्रद्धापूर्वक निभाया जाता है। इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारण हैं। आइए जानते हैं इस परंपरा को निभाने के पीछे का असल कारण क्या है?
शादी में हल्दी की रस्म का महत्व
हिंदू संस्कृति में हल्दी का खास महत्व है। यह एकमात्र मसाला ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद के नजरिए से भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
हल्दी का इस्तेमाल सिर्फ शादी समारोहों में सौंदर्यता के लिहाज से ही नहीं किया जाता है, बल्कि इसे शादी की तैयारियों का शुभ प्रतीक भी माना जाता है। हल्दी लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ मन भी शांत होता है।
हल्दी सौभाग्य और सुरक्षा का प्रतीक
धार्मिक नजरिए से देखा जाए तो, हल्दी लगाने के बाद इसी सुंगध हमारे शरीर में नकारात्मक और सकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जाओं को आकर्षित करती है। हल्दी लगाने के बाद हमारा शरीर काफी ऊर्जावान हो जाता है।
ऐसी स्थिति में अगर आप हल्दी लगाने के बाद घर से बाहर जाते हैं और किसी भी तरह की नकारात्मक या अशुभ ऊर्जा के प्रभाव में आते हैं, तो इसका अशुभ प्रभाव वैवाहिक जीवन पर भी देखने को मिल सकता है। इसी वजह से दूल्हा और दुल्हन को हल्दी लगाने के बाद घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती है, ताकि उनकी सकारात्मक ऊर्जा बरकरार रहे और विवाह में कोई बाधा न आए।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हल्दी की सुंगध राहु और केतु जैसे ग्रहों से जुड़ी होती है। शादी में हल्दी की रस्म के बाद घर से बाहर निकलने से इन ग्रहों का प्रभाव भी बढ़ सकता है, जिससे मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए दूल्हा और दुल्हन को हल्दी की रस्म के बाद घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है।

हल्दी के वैज्ञानिक कारण
इस विवाह से जुड़े अनुष्ठान के पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि, हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है, जो स्किन में गहराई तक प्रवेश करती है। हल्दी लगाने के बाद त्वचा काफी संवेदनशील हो जाती है। इस दौरान धूप में निकलने से जलन या त्वचा काली पड़ सकती है।
इसी वजह से पुराने समय में लोग कहा करते थे कि, हल्दी लगने के बाद दूल्हा-दुल्हन को बाहर नहीं जाना चाहिए, ताकि चेहरे की चमक और सुंदरता बनी रहे और किसी भी तरह की एलर्जी का खतरा भी न हो।
शरीर पर हल्दी मलने से रोमछिद्र खुलने के साथ त्वचा साफ हो जाती है, जिस पर गंदगी और धूल आसानी से जमा हो जाती है। यही वजह है कि, शरीर में हल्दी लगाने के बाद दूल्हा-दुल्हन घर से बाहर नहीं जाते हैं।
हल्दी रस्म का सामाजिक पहलू
हल्दी की रस्म का सामाजिक पहलू यह कहता है कि, दूल्हा और दुल्हन को रस्म के बाद घर पर रहकर ही अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ समय बिताना चाहिए। इस पल को नवविवाहित जोड़े के बीच पारिवारिक बंधन और एकता का प्रतीक माना जाता है।
इस दौरान घर के सभी सदस्य जिनमें रिश्तेदार और खासकर महिलाएं शामिल हैं, दूल्हा-दुल्हन के लिए गीत गाते हैं और उन्हें हल्दी लगाते हैं। यही वजह है कि, हल्दी की रस्म धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक नजरिए से खास मानी जाती है।
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