जगन्नाथ धाम का 'निर्माल्य' प्रसाद: क्या है इस छोटी सी लाल पोटली का रहस्य?
जगन्नाथ धाम पुरी में मिलने वाले निर्माल्य प्रसाद (सूखे चावल) का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसे प्रभु को अर्पित किया गया महाप्रसाद माना जाता है।

जगन्नाथ पुरी में मिलने वाली लाल निर्माल्य पोटली

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ओडिशा के पवित्र जगन्नाथ धाम पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन और उनके महाप्रसाद का खास धार्मिक महत्व है। जगन्नाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को वहां से आते समय चावल की छोटी पोटली जरूर लानी चाहिए।
दर्शन के लिए आने वाले कई भक्त इस जगन्नाथ धाम में मिलने वाली खास पोटली की महिमा नहीं जानते हैं। इस छोटी से पोटली के अंदर भगवान जगन्नाथ का सूखा प्रसाद (चावल के दाने) होता है, जिसे निर्माल्य कहा जाता है।
स्कंद पुराण में निर्माल्य की महिमा पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई है। माना जाता है कि, यह कोई साधारण चावल नहीं, बल्कि प्रभु को अर्पित किया गया महाप्रसाद अन्न होता है।
निर्माल्य प्रसाद से जुड़ी मान्यताएं
जगन्नाथ धाम में मिलने वाली निर्माल्य की पोटली में मिलने वाले चावल को जो व्यक्ति प्रतिदिन खाता है, भगवान उसकी रक्षा स्वयं करते हैं। इसके अलावा जिन भी घरों में यह पोटली होती है, वहां पर कभी भी धन- धान्य की कमी नहीं होती है।
इसके अलावा किसी व्यक्ति के अंतिम समय में इस पोटली में मिलने वाले चावल का एक भी दाना डाल दिया जाए, तो मृत्यु के पश्चात उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए कहा जाता है कि, जब कभी भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए जाए तो यह निर्माल्य प्रसाद जरूर लाए।
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निर्माल्य प्रसाद को कैसे तैयार किया जाता है?
मंदिर से जुड़ी परंपरा के अनुसार, इस पके हुए प्रसाद को मंदिर के प्रांगण में तेज धूप में सुखाया जाता है,ताकि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। चावल के पूरी तरह से सूख जाने के बाद इसे लाल या गुलाबी रंग की छोटी-छोटी पोटलियों में बांधकर भक्तों को प्रदान किया जाता है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, निर्माल्य को काफी शुभ माना गया है। भक्तों को इसे सम्मान पूर्वक अपने पूजा कक्ष में रखना चाहिए।
जब कभी भी घर में किसी भी तरह का धार्मिक अनुष्ठान या यात्रा पर जाना हो, तो प्रभु जगन्नाथ के आशीर्वाद के रूप में इसे ग्रहण करना शुभ माना जाता है।

घर में निर्माल्य पोटली रखने के खास नियम
घर के अंदर इस पोटली को साफ-सुथरे स्थान पर रखना चाहिए।
इसके मंदिर में पूजा करते वक्त धूप-दीप दिखाना चाहिए।
अगर निर्माल्य में रखा चावल किसी कारण से खराब होने लगे, तो इसे बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए या किसी तुलसी के पौधे में रखना भी बेहतर विक्लप होगा।
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