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    क्या परिवार के सभी सदस्य एक ही माला से जप कर सकते हैं? जानें शास्त्र से जुड़े नियम

    Updated: Thu, 30 Apr 2026 01:39 PM (IST)

    क्या परिवार के सभी सदस्य एक ही माला से जप कर सकते हैं? आइए यहां जानते हैं शास्त्र के नियम और जप माला से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें। ...और पढ़ें

    जप की माला से जुड़े जरूरी नियम। Ai Generated Image

    जप की माला से जुड़े जरूरी नियम। Ai Generated Image

    HighLights

    1. देवता के अनुसार अलग-अलग माला का महत्व है

    2. जप करते समय तर्जनी उंगली के स्पर्श से बचना चाहिए

    3. जप के दौरान पवित्रता बनाए रखने के लिए गोमुखी का उपयोग करना चाहिए

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हिंदू परिवारों के घर के मंदिर में एक या दो मालाएं रखी होती हैं, जिनका उपयोग परिवार के सभी सदस्य अपनी सुविधानुसार जप के लिए कर लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि धार्मिक दृष्टि से यह कितना सही है? शास्त्रों में जप की माला को बहुत पवित्र माना गया है। माला सिर्फ जप के लिए नहीं है, बल्कि यह आपकी साधना और ऊर्जा का एक भंडार है। आइए जानते हैं माला से जुड़े वे महत्वपूर्ण नियम जो हर साधक को पता होने चाहिए।

    jaap rules

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    क्या एक ही माला का उपयोग सही है?

    शास्त्रों के अनुसार, एक ही माला का उपयोग परिवार के अलग-अलग सदस्यों को नहीं करना चाहिए। इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक कारण है, जब हम किसी मंत्र का जप करते हैं, तो हमारे शरीर की सकारात्मक ऊर्जा और उस मंत्र की शक्ति उस माला के मनकों में समाहित हो जाती है। ऐसे में अगर कोई दूसरा व्यक्ति उसी माला का उपयोग करता है, तो दोनों व्यक्तियों की ऊर्जा के बीच टकराव होता है। इससे जप का पूरा फल नहीं मिलता है और माला की शक्ति भी कम हो जाती है।

    माला जप के नियम

    • व्यक्तिगत माला - हर व्यक्ति की अपनी अलग माला होनी चाहिए। पति-पत्नी या भाई-बहन को भी एक-दूसरे की माला का उपयोग करने से बचना चाहिए।
    • गोमुखी का उपयोग - जप करते समय माला को हमेशा 'गोमुखी' के अंदर रखना चाहिए। माला को कभी भी खुला रखकर जप नहीं करना चाहिए, क्योंकि कहा जाता है कि खुली माला के जप का फल 'इंद्र देव' ले जाते हैं।
    • तर्जनी उंगली का वर्जित होना - जप करते समय तर्जनी उंगली का स्पर्श माला को नहीं होना चाहिए। इसे 'अहंकार' की उंगली माना जाता है। जप अंगूठे और अनामिका या मध्यमा की मदद से करना चाहिए।
    • सुमेरु का उल्लंघन - माला के सबसे ऊपर वाले बड़े मनके को 'सुमेरु' कहते हैं। जप करते समय कभी भी सुमेरु को पार नहीं करना चाहिए। वहां पहुंचकर माला को घुमाकर वापस शुरू करना चाहिए।

    देवता के अनुसार माला का चुनाव

    • भगवान विष्णु/कृष्ण: तुलसी की माला।
    • भगवान शिव: रुद्राक्ष की माला।
    • माता लक्ष्मी: कमल गट्टे या स्फटिक की माला।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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