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तुलसी चालीसा का चमत्कार: ज्येष्ठ के महीने में नियमित पाठ से घर में होगा रिद्धि-सिद्धि का वास

Published: Mon, 20 Apr 2026 06:45 PM (IST)

ज्येष्ठ के महीने में तुलसी चालीसा का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

Jyeshtha Month Tulsi Chalisa: ज्येष्ठ माह में तुलसी चालीसा पाठ का महत्व। (Ai Generated Image)

Jyeshtha Month Tulsi Chalisa: ज्येष्ठ माह में तुलसी चालीसा पाठ का महत्व। (Ai Generated Image)

HighLights

  1. ज्येष्ठ माह में तुलसी पूजा का बड़ा महत्व है 

  2. तुलसी चालीसा का पाठ से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है

  3. देवी तुलसी को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को मात्र एक पौधा नहीं, बल्कि साक्षात विष्णुप्रिया और वृंदा स्वरूप माना गया है। ज्येष्ठ का महीना आध्यात्मिक दृष्टि से पूजा-अर्चना और दान-पुण्य का होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि ज्येष्ठ माह में अगर कोई श्रद्धापूर्वक तुलसी जी की सेवा और उनकी चालीसा का पाठ करता है, तो उसके घर में रिद्धि-सिद्धि और स्थायी लक्ष्मी का वास होता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में तुलसी चालीसा पाठ विधि और उससे मिलने वाले लाभ जानते हैं।

पाठ के लाभ

  • तुलसी चालीसा के नियमित पाठ से दरिद्रता का नाश होता है।
  • जिस घर में लगातार लड़ाई-झगड़े होते हैं, वहां शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाकर चालीसा पढ़ने से सुख-शांति आती है।
  • तुलसी चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • इस पवित्र पाठ को करने से करियर और कारोबार में सफलता मिलती है।

कैसे करें पाठ?

ज्येष्ठ माह में सुबह स्नान के बाद तुलसी जी को जल अर्पित करें। शाम के समय तुलसी के पास शुद्ध घी का या तिल के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद आसन पर बैठकर शांत मन से तुलसी चालीसा का पाठ करें। पाठ के अंत में माता तुलसी की आरती करें। ध्यान रखें कि ज्येष्ठ की गर्मी में तुलसी का पौधा सूखने न पाए, क्योंकि हरा-भरा पौधा ही खुशहाली का प्रतीक है।

।।श्री तुलसी चालीसा।। (Tulsi Chalisa)

(दोहा)

श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।
जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।

(चौपाई)

नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।
दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।
विष्णुप्रिया जय जयति भवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।
भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।
जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।
कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।
कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।
श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।
छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।
औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता।
देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।
वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।
नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।
नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।
नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।
निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।
शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
करहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।
मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।
बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।
चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।
पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।
करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।

।।दोहा।।

तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।
यह श्री तुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।
गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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