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    फ्रेंडशिप डे स्पेशल: सुदामा की सादगी से कर्ण की वफादारी तक, 5 पौराणिक कथाओं से सीखें दोस्ती के असली मायने

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 05:43 PM (IST)

    हिंदू धर्मग्रंथों में दोस्ती के महत्व और फ्रेंडशिप डे पर प्रकाश डाला गया है। कृष्ण-सुदामा से लेकर कर्ण-दुर्योधन तक, पांच पौराणिक कथाओं के माध्यम से सच ...और पढ़ें

    फ्रेंडशिप डे स्पेशल: दोस्ती पर आधारित 5 पौराणिक कथाएं

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दोस्ती का रिश्ता दुनिया में सबसे शक्तिशाली और विशेष बंधनों में से एक है, और हिंदू धर्मग्रंथों में दोस्ती के रिश्ते को पवित्र, उद्देश्यपूर्ण और गहन भावनात्मक बताते हैं। जीवन के अनुभवों और आध्यात्मिक शिक्षाओं पर आधारित है।

    हिंदू धर्म में दोस्ती धर्म का समर्थन करती हैं। भारत में हर साल मित्रता दिवस (friendship Day) अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है। मित्रता दिवस पर जानिए हिंदू पौराणिक कहानियां जो दोस्ती से जुड़ी हैं।

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    भगवान कृष्ण और सुदामा

    भगवान कृष्ण और सुदामा की दोस्ती यह दर्शाती है कि, सच्चे बंधन धन या पद से ऊपर होता है। शास्त्रों में वर्णित है कि, गरीब होते हुए भी द्वारका के राजा कृष्ण ने सुदामा का खुले मन, नम्रता और आदर के साथ स्वागत किया।

    कृष्ण ने अपने मित्र के पैर धोने के साथ सूखे चावल का साधारण सा उपहार खुशी से स्वीकार किया। भगवान कृष्ण और सुदामा की दोस्ती इस बात का प्रतीक है कि, सच्ची दोस्ती ईमानदारी, विनम्रता और कृतज्ञता को महत्व देती है।

    भगवान कृष्ण और अर्जुन

    भगवान कृष्ण अर्जुन के सिर्फ मार्गदर्शक ही नहीं थे बल्कि एक सच्चे दोस्त भी थे। कुरुक्षेत्र के युद्ध के दौरान जब अर्जुन भ्रमित और कमजोर महसूस कर रहे थे, तब भगवान कृष्ण ने उनका साथ नहीं छोड़ा।

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    इसके बजाय उन्होंने अर्जुन को भगवद्गीता का अमूल्य ज्ञान प्रदान किया। कृष्ण ने अर्जुन के खातिर युद्ध नहीं लड़ा बल्कि उन्हें साहस के साथ अपने कर्तव्य का सामना करना सिखाया। अर्जुन और भगवान कृष्ण की दोस्ती यह सिखाती है कि, एक सच्चा दोस्त हमेशा सहयोग करता है।

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    भगवान राम और सुग्रीव

    रामायण काल में भगवान राम और सुग्रीव की दोस्ती सहानुभूति और आपसी सहयोग का सबसे बेहतर उदाहरण हैं। दोनों ही अपनी व्यक्तिगत पीड़ा का सामना कर रहे थे। जहां राम जी माता सीता की खोज में लगे थे, वहीं सुग्रीव अपना राज्य और पत्नी खोने के बाद काफी संघर्ष कर रहे थे।

    एक-दूसरे की आलोचना करने के बजाय उन्होंने एक-दूसरे का साथ दिया और सहारा बने। भगवान राम और सुग्रीव की दोस्ती इस बात का प्रतीक है कि, मित्र की पीड़ा को जितना हो सके उतना कम करने की कोशिश करें।

    भगवान राम और हनुमान

    भगवान राम और हनुमान की मित्रता हिंदू धर्म ग्रंथों में भक्ति और निष्ठा के सबसे पवित्र उदाहरणों में से एक है। आध्यात्मिक परंपराओं और शास्त्रों में यह बंधन सच्ची मित्रता, अटूट विश्वास और निस्वार्थ भाव को दर्शाता है।

    हनुमान जी ने कभी भी सेवा के बदले प्रतिफल की आशा नहीं रखी। भगवान राम और हनुमान का संबंध इस बात का प्रतीक है कि, मित्रता समानता या प्रतिफल के बारे में नहीं, बल्कि विनम्रता, विश्वास पर आधारित होनी चाहिए।

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    कर्ण और दुर्योधन

    कर्ण और दुर्योधन के बीच का रिश्ता वफादारी, कृतज्ञता और भावनात्मक निर्भरता पर आधारित था। जब समाज ने कर्ण का तिरस्कार किया, तब दुर्योधन उसके साथ खड़ा रहा, उसे सम्मान और पहचान दिलाई।

    बदले में कर्ण ने भी दुर्योधन के प्रति हमेशा वफादारी दिखाई। भले ही उसे पता था कि, दुर्योधन अन्याय के राह पर चल रहा है। कर्ण और दुर्योधन की कहानी सिखाती है कि, सच्ची मित्रता सत्य क समर्थन करती है, न कि अहंकार और लालसा का।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।