सिर्फ सुदामा और अर्जुन ही नहीं! कृष्ण जी के 'क्लोज फ्रेंड ग्रुप' में शामिल थे ये 10 नाम
भगवान कृष्ण को अक्सर योद्धा या दार्शनिक के रूप में याद किया जाता है, लेकिन वे एक महान मित्र भी थे। उनके 10 सबसे करीबी दोस्त, जिनकी दोस्ती धन और पद से ...और पढ़ें

भगवान श्रीकृष्ण के 10 सबसे करीबी दोस्त कौन थे? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हम में से ज्यादातर लोग जब भी भगवान कृष्ण की बात करते हैं, तो आमतौर पर उन्हें एक योद्धा, कुशल रणनीतिकार, दार्शनिक या भगवद् गीता से जुड़े दिव्य मार्गदर्शक के रूप में याद करते हैं। लेकिन इन भूमिकाओं के पीछे एक और उतनी ही खास और सुंदर बात छिपी है कि, भगवान कृष्ण सबसे अच्छे दोस्त भी है।
अर्जुन की अटूट निष्ठा से लेकर सुदामा सा प्रिय सखा, भगवान कृष्ण की दोस्ती धन, पद, शक्ति और यहां तक कि खून के रिश्तों से भी परे थी।
वे अपने दोस्तों के सबसे मुश्किल दौर में भी उनके साथ खड़े रहे, भटकने पर उनका मार्गदर्शन किया और उन लोगों का साथ कभी नहीं छोड़ा, जिन्होंने उनपर भरोसा किया। आइए जानते हैं भगवान कृष्ण से जुड़े उनके 10 प्रिय दोस्त कौन-कौन थे?
भगवान श्रीकृष्ण के 10 करीबी दोस्त
सुदामा
भगवान कृष्ण के परम मित्रों में सबसे पहले किसी को याद किया जाता है, तो वो है सुदामा। राजा बनने के बावजूद कृष्ण ने अपने बचपन के दोस्त का आदर-सम्मान के साथ स्वागत किया।
हिंदू परंपराओं में कृष्ण-सुदामा मिलान काफी इमोशनल पलों में से एक है। कृष्ण-सुदामा की दोस्ती बिना किसी स्वार्थ के मित्रता की निशानी का प्रतीक है।
बलराम
भगवान कृष्ण के बड़े भाई और जीवनभर के साथ, हालांकि कभी-कभी उनके बीच मीठी नोंक झोंक होती थी, लेकिन उनका रिश्ता अटूट था। दोनों ने मिलकर कई घटनाओं को यादगार बनाया। कृष्ण-बलराम के रिश्ते में दोस्ती, भाईचारा और सम्मान साफ झलकता था।
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अर्जुन
अर्जुन और भगवान कृष्ण की दोस्ती महाभारत काल की सबसे महान दोस्ती में से एक थी। जहां कृष्ण रणभूमि में अर्जुन के मार्गदर्शक, रक्षक और विश्वासपात्र बन गए। अर्जुन और कृष्ण का रिश्ता दोस्ती से कहीं अधिक बढ़कर था, जिसने दोनों ने भरोसे के साथ निभाया।
उद्धव
उद्धव भगवान श्रीकृष्ण के सबसे करीबी और विश्वासपात्र सलाहकार थे, जो अपनी कृष्ण भक्ति और कुशल बुद्धि के लिए जाने जाते थे। आज भी उद्धव के साथ माधव का नाम बड़े ही प्यार से लिया जाता है, जो उनकी गहरी दोस्ती का दर्शाता है।
सत्यकी
सत्यकी एक खतरनाक यादव योद्ध था, जो भगवान श्रीकृष्ण के सबसे करीबी साथी भी थे। सात्यकी ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में पांडवों की ओर से बड़ी ही बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी। उनकी दोस्ती वफादारी और भरोसे का प्रतीक मानी जाती है।
द्रौपदी
भले ही द्रौपदी पारंपरिक रूप से भगवान कृष्ण की दोस्त नहीं थी, लेकिन कृष्ण और उनके बीच एक खास रिश्ता था। जब-जब द्रौपदी मुश्किल में पड़ी कृष्ण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद करने के लिए मौजूद थे। द्रौपदी को भगवान कृष्ण पर अटूट विश्वास था। उनका रिश्ता विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित था।
भीम
भीम और कृष्ण के बीच का रिश्ता काफी सम्मानजनक और भरोसे से भरा था। श्रीकृष्ण अक्सर भीम के दो टूक संवाद और हिम्मती स्वभाव की तारीफ करते थे। कुरुक्षेत्र युद्ध के कई मुश्किल समय में दोनों ने मिलकर अहम भूमिका निभाई। भीम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही एक दूसरे का सम्मान करते थे।
युधिष्ठिर
भगवान कृष्ण धर्म के प्रति पांडवों में सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर का काफी सम्मान करते थे। युधिष्ठिर भी कृष्ण की समझदारी पर पूरा विश्वास करते थे। उनकी दोस्ती और कुशल रणनीति ने पांडवों को कठिन समय में मार्ग दिखाने का काम किया। यह दोस्ती नेक और भरोसे पर आधारित थी।
अक्रूर
कृष्ण के शुरुआती और सबसे पक्क समर्थकों में से एक अक्रूर था। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को गोकुल से मथुरा लाने में अहम भूमिका निभाई थी। कृष्ण के प्रति अपनी उदारता और वफादरी कभी कम नहीं की। वे हमेशा उनके भरोसेमंद साथी बने रहे। इसके अलावा अक्रूर यादव सेना के सेनापति भी थे।
दारुक
दारुक भगवान कृष्ण के सारथी और वफादार सेवक में शामिल थे। वह कई खास मौकों पर कृष्ण के साथ थे। उनकी वफादारी और लगन ने कृष्ण का हृदय जीत लिया। हालांकि पौराणिक कथाओं में दारुक को काफी नजरअंदाज किया जाता था, लेकिन फिर भी कृष्ण के सबसे करीबी दोस्तों में शामिल थे।
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