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    गोकुल के ग्वाले से 'गोपाल' बनने तक: पढ़िए कृष्ण और गायों की प्रेम कहानी

    Updated: Sat, 20 Jun 2026 07:00 PM (IST)

    हिंदू संस्कृति में गाय को 'गौ माता' कहकर संबोधित किया जाता है, जो निस्वार्थ भाव और समृद्धि का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण को गायों से जुड़े देवता के रू ...और पढ़ें

    श्रीकृष्ण का गायों के प्रति प्रेम (AI-Generated Image)

    श्रीकृष्ण का गायों के प्रति प्रेम (AI-Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू संस्कृति में गाय को 'गौ माता' कहकर संबोधित किया जाता है। यह शब्द निस्वार्थ भाव का प्रतीक है। प्राचीन धर्मग्रंथों में गाय को धन, शक्ति और शुभता से जोड़कर बताया गया है।

    ऋग्वेद जैसे प्राचीन ग्रंथों में गायों को पोषण और समृद्धि प्रदान करने वाला जीव के रूप में उल्लेख किया गया है। वे न सिर्फ भोजन का स्त्रोत थीं, बल्कि किसानी से जुड़े कार्यों के लिए भी बेहद जरूरी थीं। इसके अलावा गायों का योगदान परिवहन के रूप में भी था।

    श्रीकृष्ण गायों से जुड़े देवता

    हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के अवतार कहे जाने वाले भगवान श्रीकृष्ण गायों से जुड़े देवताओं के लिए सबसे प्रसिद्ध हैं। उनके बचपन की कहानियां जिसका जिक्र भागवत पुराण के हरिवंश पर्व में देखने को मिलता है।

    जहां उन्हें गोकुल गांव के एक शरारती लेकिन प्यारे ग्वाले के रूप चित्रित किया गया है। ग्वालों के बीच बड़े होने वाले भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बचपन का अधिकांश समय बांसुरी बजाने और गायों के साथ गुजारा है।

    कृष्ण की छवि गोपाल यानी गायों की रक्षा करने वाले इंसान के रूप में दर्ज है। गोपाल के अलावा गोविंद भी उनकी एक उपाधि है, जिसका मतलब है कि गाय को खुश करने वाला। इन भूमिकाओं के जरिए से गायों के साथ कृष्ण का संबंध दिव्य देखभाल और संरक्षण का प्रतीक बन गया, जहां गायें प्रतिनिधित्व करती हैं और भगवान श्रीकृष्ण चारवाहे के रूप में उनका मार्गदर्शन करते हैं।

    _भगवान शिव और गायों के प्रति प्रेम

    कृष्ण और गायों से जुड़ी लीलाएं

    भगवान श्रीकृष्ण को चित्रों में आमतौर पर गायों के साथ दिखाया जाता है। सबे प्रिय चित्रों में शामिल है, जब कृष्ण गोधूलि बेला में गायों को गांव वापस ले जाते हैं, उनकी बांसुरी की मधुर आवाज पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती थी। चित्रों, गीतों और नृत्यों के जरिए कृष्ण शांति, सद्भाव और दिव्य प्रेम की भावना को जाग्रत करते थे।

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    कृष्ण और कामधेनु गांव का कनेक्शन

    हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, कामधेनु मनोकामना पूरी करने वाली देवी हैं, जिनके बारे में बताया जाता है कि, वे सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। अगर कृष्ण की गायें शाब्दिक रूप से कामधेनु नहीं थीं, फिर भी उनका उतना ही सम्मान किया जाता था। गायों से भौतिक और आध्यात्मिक दोनों ही तरह की आशीर्वाद मिलने की धारणा इसी मान्यता से पैदा हुई है।

    कृष्ण के गोकुल में गायें केवल पशुधन नहीं थीं, बल्कि प्रिय सखा भी थीं। यह हिंदू धर्म की उस व्यापक परंपरा को दर्शाता है, जिसमें गाय को प्रचुरता का सजीव रूप बताया जाता था। यही कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जो कृष्ण के गाय प्रेमी होने की बात को उजागर करता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।