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    क्या वाकई खींची गई थी लक्ष्मण रेखा? मूल रामायण में नहीं है इसका वर्णन, आखिर कहां से आई ये कहानी?

    Updated: Thu, 14 May 2026 12:49 PM (IST)

    वाल्मीकि रामायण को सबसे प्रामाणिक और साक्ष्यजनक रामायण माना जाता है, लेकिन क्या उसमें लक्ष्मण रेखा का जिक्र मिलता है? ...और पढ़ें

    लक्ष्मण रेखा का रहस्य (Picture Credit- AI Generated)

    लक्ष्मण रेखा का रहस्य (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. वाल्मीकि रामायण में लक्ष्मण रेखा का सीधा वर्णन नहीं

    2. श्रीरामचरितमानस में मंदोदरी के प्रसंग में इसका जिक्र

    3. क्षेत्रीय रामायणों से यह कथा समाज में हुई लोकप्रिय

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आपसे रामाणय का यह प्रसंग आपने जरूर पढ़ा या सुना होगा कि किस प्रकार लक्ष्मण जी ने सीता माता की सुरक्षा के लिए कुटिया के चारों ओर एक सुरक्षा रेखा खींची थी, जिसे हम लक्ष्मण रेखा के रूप में जानते हैं।

    लेकिन क्या आपको पता है कि मूल रामायण यानी वाल्मीकि रामायण में साफ तौर पर इसका वर्णन नहीं मिलता। चलिए जानते हैं इस बारे में।

    कहां मिलता है पहला जिक्र

    महर्षि वाल्मीकि की रामायण में सीता हरण के समय लक्ष्मण द्वारा कोई रेखा खींचने का वर्णन नहीं है।आधुनिक काल के कुछ विद्वानों का ये भी तर्क है कि लक्ष्मण रेखा का प्रसंग बाद के कुछ ग्रंथों में जोड़ा गया था। गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस में सीधे तौर पर तो लक्ष्मण रेखा का जिक्र नहीं किया, लेकिन लंकाकांड में इस रेखा का उल्लेख कुछ इस प्रकार मिलता है -

    "कंत समुझि मन तजहु कुमति ही।
    सोई न समर तुम्हहि रघुपति ही।।
    रामानुज लघु रेख खचाई।
    सोउ नहिं नाधेहु असि मनुसाई"।।

    यह पंक्ति श्रीरामचरितमानस के लंकाकांड (दोहा 36) की है, जिसमें मंदोदरी रावण को समझाते हुए ताना मारती है कि 'हे कांत! (रावण) ये कुबुद्धि को छोड़ दो। आपका रघुनाथजी से युद्ध करना शोभा नहीं देता। आप में इतना भी पुरुषार्थ नहीं है, आप उनके छोटे भाई लक्ष्मण द्वारा खींची गई छोटी-सी रेखा (लक्ष्मण रेखा) को भी पार कर सको। 

    Lakshman rekha i

    (Picture Credit- AI Generated)

    इसके साथ ही लक्ष्मण रेखा का जिक्र 15वीं शताब्दी में कृतिबास ओझा द्वारा रचित बांग्ला रामायण (कृत्तिवासी रामायण या श्रीराम पांचाली) में मिलता है। इसके अलावा, कुछ अन्य क्षेत्रीय रामायणों में भी इस प्रसंग का उल्लेख मिलता है, जिसे आज लेकर हम सब यही मानते हैं कि यह प्रसंग मूल रामायण का हिस्सा है।

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    लक्ष्मण रेखा: भक्ति और सुरक्षा का प्रतीक

    एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, रामायण एक आदर्श ग्रंथ है, जिसमें हर पात्र का आचरण अपनी पराकाष्ठा पर है। वाल्मीकि रामायण में 'लक्ष्मण रेखा' का कोई सीधा वर्णन नहीं मिलता है। लक्ष्मण रेखा का वृत्तांत मुख्य रूप से बाद के क्षेत्रीय साहित्य और नाटकों के माध्यम से लोकप्रिय हुआ है।

    यह प्रसंग लक्ष्मण जी की अपनी भाभी के प्रति अटूट निष्ठा और उनकी सुरक्षा के प्रति उनके गहरे संकल्प को दर्शाता है। भले ही मूल ग्रंथ में इसका उल्लेख न हो, लेकिन यह कथा समाज में मर्यादा और सुरक्षा के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में जानी जाती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।