ब्रह्मा जी को क्यों मिला अपनी ही पत्नी से श्राप, जिसका आज भी दिखाई देता है प्रभाव
हिंदू धर्म ग्रंथों में ऐसी कई कथाएं मिलती हैं जो आपको प्रेरणा देने के साथ-साथ अचंभित भी करती हैं। आपने गौर किया होगा कि त्रिदेवों में शामिल भगवान विष् ...और पढ़ें

Lord Brahma story in hindi (AI Generated Image)
HighLights
ब्रह्मा जी ने पुष्कर में सृष्टि कल्याण हेतु किया था महायज्ञ
भारत में ब्रह्मा जी का एकमात्र मुख्य मंदिर पुष्कर में स्थित है
माता सावित्री ने ब्रह्मा को क्रोध में आकर दिया था ये श्राप
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता हैं और महेश अर्थात भगवान शिव सृष्टि के संहारक हैं। वहीं ब्रह्मा जी सृष्टि के निर्माता के रूप में जाने जाते हैं। सृष्टि के रचयिता होने के बाद भी भारत में ब्रह्मा जी का केवल एक ही मुख्य मंदिर स्थापित है, जो राजस्थान के पुष्कर में है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा मिलती है, जो माता सावित्री (Mata Savitri) से जुड़ी है। चलिए जानते हैं इस बारे में।
ब्रह्मा जी ने किया महायज्ञ का आयोजन
पद्म पुराण में वर्णित है कि एक बार ब्रह्मा जी ने सृष्टि के कल्याण के लिए पुष्कर में एक महायज्ञ का आयोजन किया था। शास्त्रों के अनुसार, किसी भी यज्ञ में पत्नी का साथ होना अनिवार्य है, वरना उस यज्ञ का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। लेकिन यज्ञ के शुभ मुहूर्त के दौरान माता सावित्री वहां उपस्थित नहीं थीं और यज्ञ का समय निकला जा रहा था। इस कारण से ब्रह्मा जी ने वहां मौजूद एक स्थानीय कन्या गायत्री से विवाह कर लिया और उसके साथ यज्ञ प्रारंभ कर दिया।

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माता सावित्री ने दिया ये श्राप
जब माता सावित्री महायज्ञ के आयोजन में पहुंचीं, तो उन्होंने पाया कि उनके स्थान पर ब्रह्मा जी (Lord Brahma) के साथ कोई अन्य स्त्री बैठी हैं। यह देखकर वह अत्यंत क्रोधित हो गईं। उन्होंने ब्रह्मा जी को यह श्राप दे दिया कि भले ही आप सृष्टि के रचयिता हैं, लेकिन पूरे संसार में आपकी पूजा कहीं नहीं होगी।

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देवताओं ने की विनती
जब देवताओं ने माता सावित्री से शांत होने की विनती की, तो उन्होंने कहा कि केवल पुष्कर ही वह एकमात्र ऐसा स्थान होगा, जहां ब्रह्मा जी की विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की जाएगी। यही कारण माना जाता है कि भारत में केवल पुष्कर में ही ब्रह्मा जी का मंदिर स्थापित है, जो अपनी विशिष्टता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
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