दरिद्रता और दुर्भाग्य होगा कम, 3 जुलाई को करें गणपति के इस खास स्वरूप की पूजा
आषाढ़ मास की कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी 3 जुलाई को है, जिसमें भगवान कृष्णपिङ्गल महागणपति की पूजा की जाती है। यह व्रत दरिद्रता, दुर्भाग्य दूर कर मानसि ...और पढ़ें

3 जुलाई को कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी पर करें महागणपति की विशेष पूजा (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिन्दू पंचांग के अनुसार चंद्र मास की चौथी तिथि को चतुर्थी कहते हैं। हर माह यह आती है और इसमें विशेष रूप से गणपति जी की पूजा की जाती है। आषाढ़ मास की के कृष्ण पक्ष में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को 'कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी' कहा जाता है। इस दिन भगवान श्री गणेश के 'कृष्णपिङ्गल महागणपति' स्वरूप की पूजा की जाती है। श्री गणेश का यह स्वरूप बहुत ही शक्तिशाली होता है। इस बार यह पूजा 3 जुलाई की दी की जानी है।
चलिए हम आपको इस श्री गणेश के इस स्वरूप की विशेषता के बारे में बताते हैं और जानते हैं कि इनकी पूजा के क्या नियम हैं।
क्या है भगवान श्री गणेश के 'कृष्णपिङ्गल महागणपति' स्वरूप की विशेषता?
भगवान श्री गणेश के इस स्वरूप की पूजा और व्रत आषाढ़ माह की कृष्ण चतुर्थी पर रखा जाता है और इसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। मान्यता अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों को इस इस दिन व्रत रखने का उपदेश दिया था। इस दिन व्रत रखने से पांडवों के वनवास के दिन आसानी से कट गए थे और उन्हें इर प्राकर के संकट से लड़ने की शक्ति भी मिली थी।
भगवान श्री गणेश के 'कृष्णपिङ्गल महागणपति' स्वरूप का व्रत रखने के फायदे
- जो भी भक्त भगवान श्री गणेश के 'कृष्णपिङ्गल महागणपति' स्वरूप का व्रत रखता है, उसके सभी प्रकार के दुखों का नाश होता है।
- इस व्रत को रखने से और भगवान श्री गणेश के इस स्वरूप की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति मिलती है और जीवन से तनाव दूर हो जात है।
- यह व्रत संतान की सुख और समृद्धि के लिए भी रखा जा सकता है। खासतौर पर अगर आपकी कोई भी मनोकामना है, तो इस व्रत को रखकर आप भगवान गणेश से उसके पूरे होने का आशीर्वाद पा सकते हैं।
- किसी जातक की कुंडली में अगर बुध और चंद्रमा से जुड़े दोष हैं, तो उनका प्रभाव भी श्री गणेश के इस स्वरूप की पूजा करने से कम हो जाता है।
अत: श्री गणेश का यह स्वरूप बहुत ही अच्छे फल देने वाला है। जीवन में कष्ट हैं तो आपको भी इस दिन जरूर व्रत रखना चाहिए।
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