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    जब 15 दिन बीमार रहते हैं भगवान जगन्नाथ, तो कहां लगता है उनका दरबार?

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 12:30 PM (IST)

    पुरी में जगन्नाथ मंदिर रथ यात्रा से पहले 15 दिनों के लिए बंद होने पर भक्त अलारनाथ मंदिर जाते हैं। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, जहां भगवान जगन् ...और पढ़ें

    जगन्नाथ मंदिर बंद होने के बाद कहां होते हैं दर्शन?

    जगन्नाथ मंदिर बंद होने के बाद कहां होते हैं दर्शन?

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उड़ीसा के पुरी में भगवान जगन्नाथ का धाम अत्यंत पवित्र और भक्तिमय वातावरण से भरा रहता है। हर साल यहां भव्य रथ आयोजन किया जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुचते हैं।

    लेकिन क्या आपको पता है कि, जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को स्नान कराने के बाद जब जगन्नाथ मंदिर 15 दिनों के लिए बंद हो जाता है, तो भक्त कहां दर्शन करने जाते हैं और क्या है इसके पीछे की पौराणिक कथा आइए जानते हैं।

    शाही स्नान के बाद 15 दिनों के लिए सार्वजनिक दर्शन बंद

    रथयात्रा शुरू होने से पहले भगवान जगन्नाथ उनके भाई और बहन को स्नान कराया जाता है, तो मान्यता है कि, देवता बीमार पड़ जाते हैं। देवताओं को नहाने के लिए कुल 108 औषधीय एवं सुगंधित पानी के पात्रों का इस्तेमाल किया जाता है।

    इस शाही स्नान समारोह से 15 दिन तक तीनों देवताओं के सार्वजनिक रूप से दर्शन नहीं होते हैं। इस अवधि को अनासार के नाम से जाना जाता है। इस दौरान भक्त जगन्नाथ मंदिर में प्रभु के दर्शन नहीं कर पाते हैं।

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    जगन्नाथ मंदिर में 15 दिन दर्शन बंद, तब भक्त कहां जाते हैं?

    शाही स्नान के बाद जब जगन्नाथ मंदिर में 15 दिनों के लिए सार्वजनिक दर्शन पर रोक रहती है, तो भक्त अलारनाथ मंदिर परिसर की ओर रुख करते हैं।

    आषाढ़ माह के कृष्णपक्ष के दौरान अलारनाथ मंदिर में भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। यह मंदिर पुरी से करीब 18 किलोमीटर दूर है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है।

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    भगवान अलारनाथ 

    अलारनाथ मंदिर में खीर का भोग

    अनासार के दौरान जब भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ जाते हैं, तब अलारनाथ मंदिर परिसर में भगवान को खीर का भोग लगाया जाता है और भक्तों को भी यही खीर भोग के रूप में दिया जाता है।

    इस मंदिर में भगवान विष्णु अलारनाथ भगवान के रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर में प्रतिष्ठित भगवान विष्णु अपने विग्रह रूप के साथ-साथ प्रार्थना मुद्रा में अपने प्रिय वाहन गरुड़ के साथ विराजमान हैं।

    अलारनाथ मंदिर में मिलने वाली खीर अस्वस्थ व्यक्तियों के लिए औषधि के रूप में काम करती है। इस मंदिर को खासतौर पर पहचान तब मिली जब सोलहवीं शताब्दी में श्री चैतन्य महाप्रभु ने यहां भगवान जगन्नाथ के रूप में भगवान अलारनाथ के दर्शन किए।

    तब से लेकर आज तक यह स्थान भगवान जगन्नाथ का अस्थायी निवास स्थान माना जाता है। इन खास दिनों में मंदिर परिसर में भगवान अलारनाथ को प्रतिदिन उतनी ही मात्रा में भोग लगाया जाता है, जितनी मात्रा सामान्य दिनों में पुरी के भगवान जगन्नाथ स्वामी को चढ़ाया जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।