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    जब राजा ने खींचे भगवान जगन्नाथ के बाल, तो बहने लगा खून; पढ़ें पुरी मंदिर का यह चमत्कारी किस्सा

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 07:00 PM (IST)

    पुरी के भगवान जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी एक चमत्कारी कथा, जिसमें पुजारी तालिचा मोहपात्रा और राजा शामिल हैं। कहानी में भगवान जगन्नाथ ने अपने भक्त को राजा क ...और पढ़ें

    भगवान जगन्नाथ के बालों से जुड़ा रहस्य (Picture Credit- AI Generated)

    भगवान जगन्नाथ के बालों से जुड़ा रहस्य (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उड़ीसा के पुरी के स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर और उनसे जुड़े कई किस्से और घटनाओं का चमत्कारी वर्णन लोककथाओं और दक्षिणी ग्रंथ शास्त्रों में देखने को मिलता है। ऐसा ही एक किस्सा पुरी में तालिच मोहपात्रा नाम के एक ब्राह्मण से जुड़ा है।

    प्रचलित लोककथाओं के अनुसार, वह भगवान जगन्नाथ के पूजारियों में से एक था। सुबह से लेकर शाम तक भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की सेवा करता था।

    तालिचा मोहपात्रा से जुड़ी कथा

    एक दिन मंदिर में दर्शन के लिए राजा आए। आमतौर पर देखा जाता है कि, जब राजा मंदिर आता था तो वह देवताओं की महाप्रसाद के रूप में माला मांगता था। जगन्नाथ भगवान ने उस दिन माला नहीं पहनी थी। मोहपात्रा को डर और अपमान सताने लगा कि, राजा ने माला मांगी और मैंने देने से मना कर दिया तो क्या होगा? आखिर में उसने अपने गले में पहनी माला उतरकर जगन्नाथ भगवान को पहना दी। जब राजा दर्शन के लिए आए तो उन्होंने प्रसाद स्वरूप भगवान की माला मांगने की इच्छा जताई, पंडित ने भगवान जगन्नाथ की माला राजा को दे दी। भगवान के दर्शन के बाद राजा अपने महल की ओर प्रस्थान कर गया।

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    महल पहुंचने के बाद राजा ने जो माला पहनी थी, वो जूही के फूलों से बनी थी, जिसमें से तीव्र सुंगध आ रही थी। राजा अपने सिंहासन पर बैठे हुए फूल की माला को निहार रहे थे कि, तभी अचानक उन्हें उसमें एक लंबा और काला बाल दिखाई दिया। राजा ने सोचा यह काफी अजीब है। यह बाल माला में कैसे हो सकती है, क्योंकि भगवान जगन्नाथ के सिर पर तो बाल ही नहीं है। माला पर बाल को देख राजा समझ चुका था कि, पंडित ने उसे झूठ बोलकर अपनी माला दे दी।

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    भगवान ने भक्त के झूठ को किया सच

    राजा इस बात से काफी क्रोधित हुए, उन्होंने फौरन मोहपात्रा को बुलाने का आदेश दिया। जब मोहपात्रा राजा के सामने आया तो, राजा ने कहा कि, मुझे भगवान की माला में एक बाल मिला है। मुझे बताइए भगवान के सिर पर बाल कब से आ गए। मुझे सच बताओ नहीं तो तुम्हें मृत्युदंड की सजा मिलेगी। राजा की इस बात से घबराकर पंडित मोहपात्रा ने झूठ बोलते हुए कहा कि, कुछ समय से जगन्नाथ भगवान के सिर पर बाल उग रहे हैं। तब राजा ने कहा ठीक है मैं कल सुबह मंदिर आउंगा और तुम मुझे खुद दिखाना भगवान के सिर पर उगे हुए बाल।

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    तालिचा मोहपात्रा मंदिर लौटकर भगवान की सेवा में लीन हो गया। सेवा खत्म होने के बाद उसने भगवान को प्रणाम किया और इस संकट से बचने के लिए प्रार्थना की। इसके बाद मोहपात्रा मंदिर के कपाट बंद करके अपने घर चला गया। उसने अपने बिस्तर के पास एक जहर का गिलास रख लिया और योजना बनाई की अगर भगवान मेरी रक्षा न कर पाए तो मैं उस विष को पी लूंगा। तालिचा मोहपात्रा किसी चमत्कार की उम्मीद में सो गए।

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    रात में मोहपात्रा के सपने में भगवान जगन्नाथ ने दर्शन देते हुए कहा कि, 1 क्या 10 लाख राजा भी आ जाएं,तो तुम्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं। तुम्हें क्या लगता है मेरे सिर पर बाल नहीं है, क्या मैं गंजा हूं। कल मंदिर आना तुम्हें मैं दिखाउंगा मेरे सिर पर कितने घने बाल हैं।

    जगन्नाथ स्वामी के चमत्कार को देख राजा भी हुआ हैरान

    अगले दिन मोहपात्रा जागा और रात के सपने के बारे में सोचा कि, भगवान ने जरूर अपनी कोई कृपा दिखाई होगी। वह स्नान करने के बाद मंदिर पहुंचा, कपाट खोल भगवान के दर्शन किए। वे देखकर हैरान हो गया कि, भगवान के सिर पर लंबे और काले घने बाले हैं।

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    कुछ समय बाद राजा मंदिर पहुंचा और मोहपात्रा से बाल दिखाने को कहा। राजा ने जब जगन्नाथ स्वामी के दर्शन किए तो वे उनके बालों को देखकर काफी हैरान हो गए। राजा ने पुजारी से पूछा आपने भगवान के सिर पर ये बाल कैसे लगाएं। क्या गोंद का इस्तेमाल किया है। मोहपात्रा ने आगे बढ़कर कहा,महाराज आप खुद देख लीजिए बाल असली हैं या नकली?

    राजा ने जगन्नाथ भगवान के सिर के कुछ बाल खींचे, तुरंत उनके सिर से खून बहने लगा। यह देखकर राजा बेहोश हो गया। होश आने पर उन्होंने मोहपात्रा के पैर पकड़ लिए। इस घटना के बाद से राजा काफी हैरान हुआ। उसने पुजारी को सम्मानजनक उपहार भेंट किया।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।